अब गिरफ्तारी से 2 घंटे पहले आरोपी को बताना होगा गुनाह, लापरवाही पर नपेंगे पुलिसकर्मी

अब गिरफ्तारी से 2 घंटे पहले आरोपी को बताना होगा गुनाह, लापरवाही पर नपेंगे पुलिसकर्मी
भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश में अब पुलिस अपनी मर्जी से किसी व्यक्ति को हिरासत में लेकर सीधे जेल नहीं भेज सकेगी। आरोपियों की मनमानी गिरफ्तारी पर नकेल कसते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने एक राज्यव्यापी सर्कुलर जारी किया है।
नए नियमों के तहत, गिरफ्तारी से पहले आरोपी को लिखित रूप में ठोस कारण बताना अनिवार्य होगा। यदि पुलिस ऐसा करने में विफल रहती है, तो न केवल गिरफ्तारी को अवैध माना जाएगा, बल्कि संबंधित अधिकारी पर अदालत की अवमानना की गाज भी गिर सकती है।
सर्कुलर की 3 बड़ी बातें:
समय की पाबंदी: गिरफ्तारी के कारणों की लिखित जानकारी आरोपी को पकड़ने के वक्त या फिर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने से कम से कम 2 घंटे पहले देनी होगी।
अपनी भाषा में समझ: आरोपी को उसकी क्षेत्रीय या स्थानीय भाषा में ही कारणों का विवरण देना होगा, ताकि वह कानूनी स्थिति को पूरी तरह समझ सके।
कड़ी कार्रवाई: इन दिशा-निर्देशों की अनदेखी करने पर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मौलिक अधिकारों की सुरक्षा
PHQ द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि यह कदम गिरफ्तारी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया है। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी और पुलिस कमिश्नरों को हिदायत दी है कि वे अपने अधीनस्थ स्टाफ को इन नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए प्रशिक्षित करें।
सुप्रीम कोर्ट के 6 नवंबर 2025 के आदेश के बाद अब पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली बदलनी होगी। प्रक्रिया में चूक होने पर आरोपी को तत्काल रिहाई का कानूनी अधिकार मिल सकेगा।







