मंडलाlसामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मवई में एक युवक की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक तंत्र की घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता उजागर हुई है। मृतक युवक के शोकाकुल परिवार को पोस्टमार्टम जैसी बुनियादी विधिक प्रक्रिया के लिए 24 घंटे से अधिक समय तक भीषण ठंड, भूख और तनाव के बीच अस्पताल परिसर में रात गुजारनी पड़ी। इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की अव्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया गया कि जब गंभीर अवस्था में लाए गए युवक को डॉक्टरों के भरसक प्रयास के बावजूद बचाया नहीं जा सका और मृत्यु के बाद परिजनों ने उम्मीद की थी कि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया जल्द पूरी होगी, लेकिन अस्पताल प्रशासन की अव्यवस्था के चलते पोस्टमार्टम उस दिन नहीं हो सका और रात भर पीएम के लिए परिजनों को इंतजार करना पड़ा। इस दौरान कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी परिजनों की सुध लेने या स्थिति को संभालने के लिए तैयार नहीं दिखा। बताया गया कि युवक की मौत के बाद परिजनों को सीएचसी में रात गुजारनी पड़ी, इस दौरान परिजनों के पास न गर्म कपड़े थे और न ही खाने की व्यवस्था। एक परिवार को जिसने अपने घर के सदस्य को खोया हो, उसे कड़ाके की ठंड में पूरी रात खुले में बितानी पड़ी। यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनहीनता का दुखद उदाहरण है।
धरने के एक घंटे बाद हुई कार्रवाई
बताया गया कि अगले दिन भी पीएम समय से नहीं हो सका, और स्थानीय प्रशासन चुप्पी साधे बैठा रहा। तब स्थानीय लोगों का धैर्य जवाब दे गया। मवई ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष संतोष रानू हार्दहा ने परिजनों और स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर दोपहर लगभग 3 बजे अस्पताल के सामने शांतिपूर्ण धरना शुरू किया। धरने में शामिल लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। लोगों का सब्र टूटते देख स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आया और जो काम 30 घंटे तक रुका था, वह धरना शुरू होने के एक घंटे के भीतर शाम करीब 4 बजे पूरा कर दिया गया। क्षेत्र की जनता अब मांग कर रही है कि इस गंभीर लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच हो और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
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