भोपाल

दुनिया से जाते-जाते तीन को जीवन दे गया सतेंद्र -सडक़ दुर्घटना में मृत युवक के लिवर, हार्ट और किडनी हुए दान

दुनिया से जाते-जाते तीन को जीवन दे गया सतेंद्र
-सडक़ दुर्घटना में मृत युवक के लिवर, हार्ट और किडनी हुए दान
-जबलपुर मेडिकल कॉलेज से भोपाल व अहमदाबाद भेजे जा रहे अंग

भोपाल, यश भारत।
सिवनी जिले के घंसौर तहसील के बिछुआ गांव में रहने वाले 31 वर्षीय सत्येंद्र यादव का सोमवार को जबलपुर में सूपा ताल के पास एक्सीडेंट हो गया था, जहां उसके सिर में गंभीर चोटें आई थी और उपचार के दौरान जबलपुर मेडिकल कॉलेज में बुधवार की रात उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद परिजनों द्वारा सत्येंद्र के अंगदान करने का निर्णय लिया है। सत्येंद्र के लिवर किडनी और हार्ड को जरूरतमंद मरीजों को दिया जा रहा है, जिसके लिए जबलपुर से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर लीवर और हार्ड को भोपाल और अहमदाबाद भेजा जा रहा है। वही किडनी का डोनेशन जबलपुर में हो रहा है जिसको लेकर अहमदाबाद और दिल्ली से विशेषज्ञ टीम जबलपुर पहुंची है। इधर, भोपाल में लीवर ट्रांसप्लांट के लिए सिद्धान्ता अस्पताल में पूरी तैयारी कर ली गई हैं, साथ ही एयरपोर्ट से लेकर अस्पताल के बीच ग्रीन कॉरिडोर के लिए यातायात पुलिस बल लगाया गया है।

3 माह पहले हुई थी सत्येंद्र की शादी:-

तीन लोगों को नया जीवन देने जा रहे सत्येंद्र यादव की शादी पिछले दिनों अप्रैल महीने में ही मीनाक्षी यादव के साथ हुई थी। सत्येंद्र को सिर्फ सिर पर चोट आई थी उसके अलावा शरीर के किसी भी अंग में कोई भी चोट नहीं आई थी। मूल रूप से सत्येंद्र सिवनी जिले के घंसौर क्षेत्र के बिछुआ गांव के रहने वाले हैं। वह जबलपुर में मदन महल के पास एक गैस एजेंसी में काम किया करता था। करीबियों की माने तो उन के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है जहां उनके परिवार में उनकी माता-पिता और एक बड़े भाई हैं, अंग दान करने का निर्णय परिवार द्वारा सर्व सहमति से लिया गया है । मृतक के भाई विजय यादव ने बताया कि उनका भाई तो इस दुनिया से चला गया है लेकिन यदि उसके माध्यम से किसी और को नया जीवन मिलता है तो कहीं न कहीं उन लोगों के बीच में उनका भाई सत्येन्द्र भी जीवित रहेगा जो उन्हें बहुत संतोष देगा।

दिल्ली, अहमदाबाद और भोपाल से आई टीम:-

जबलपुर मेडिकल कॉलेज से भोपाल और अहमदाबाद ले जाए जा रहे लीवर और हार्ट को ट्रांसप्लांट करने के लिए मेदांता अस्पताल दिल्ली की टीम जबलपुर पहुंच गई है, जो की अंगदान करने वाले सत्येंद्र यादव का लिवर ट्रांसप्लांट करने के लिए भोपाल लेकर जाएगी। जहां पर विश्व के जाने-माने लिवर सर्जन डॉक्टर अरविंद सिंह सोइन भोपाल के सिद्धान्ता हॉस्पिटल में सर्जरी करेंगे, विशेषज्ञों की माने तो शरीर से लिवर निकलने के 6 घंटे के अंदर ही उसे दूसरे शरीर में ट्रांसप्लांट करना होता है ऐसे में विशेषज्ञों की एक पूरी टीम जबलपुर पहुंच गई है जो लीवर को निकालने में सहयोग करेगी और समय पर भोपाल ले जाकर एक व्यक्ति को नया जीवन देगी। इसी तरह हार्ट ट्रांसप्लांट करने के लिए अहमदाबाद से भी टीम आई हुई है जो सतेंद्र का हार्ड अपने साथ ले कर जाएगी। जबलपुर से भोपाल जो लीवर लेकर जाया जा रहा है वह भोपाल में जोधपुर राजस्थान के रहने वाले कृष्णा व्यास(58) को दिया जाएगा, जिनका रजिस्ट्रेशन पहले से था और उनका ऑपरेशन दिल्ली अस्पताल से भोपाल बुलाकर किया जा रहा है जिसमें मेदांता हॉस्पिटल के डॉक्टरों की टीम शामिल होगी।

एम्बूलेंस के आगे-पीछे चलेगा पुलिस का स्क्वार्ड:-
जिस वक्त जबलपुर से लीवर लेकर एयर एम्बूलेंस भोपाल पहुंचेगी। उस वक्त एयरपोर्ट से लेकर सिद्धान्ता अस्पताल तक एम्बूलेंस के आगे और पीछे पुलिस का स्क्वार्ड वाहन चलेगा। जिससे की एम्बूलेंस सुरक्षित अस्पताल तक पहुंच सके।

एयरपोर्ट से सिद्धान्ता अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर:-
आज जबलपुर से एयर एम्बूलेंस भोपाल के राजाभोज एयरपोर्ट तक लीवर लेकर पहुंचने के बाद एयरपोर्ट से सिद्धान्ता अस्पताल के बीच ग्रीन कॉरिडोर बनाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। एयरपोर्ट से लेकर सिद्धान्ता अस्पताल के बीच पडऩे वाले आशारात तिराहा, गुफा मंदिर तिराहा, लालघाटी चौराहा, खानूगांव तिराहा, व्हीआईपी रोड, रेतघाट तिराहा, कमला पार्क, पॉलीटेक्निक चौराहा, बाणगंगा चौराहा, रोशनपुरा चौराहा, अपेक्स बैंग तिराहा होते हुए लिंग रोड नंबर-1 से 1250 अस्पताल चौराहा होकर एंबूलेंस शिवाजी नगर स्थित सिद्धान्ता अस्पताल तक पहुंचेगी। इस दौरान इन रास्तों पर एम्बूलेंस के गुजरने के दौरान यातायात कुछ समय के लिए रोका जाएगा।

ग्रीन कॉरिडोर:-
ग्रीन कॉरिडोर अंगदान और चिकित्सा आपातकाल में इस्तेमाल होने वाली एक विशेष व्यवस्था को ग्रीन कॉरिडोर कहा जाता है। इसमें इलाजरत मरीज अथवा मृत व्यक्ति के अंगों को कम से कम समय में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए, यातायात व्यवस्था को अस्थायी रूप से नियंत्रित किया जाता है, जिससे कि बीमार व्यक्ति अथवा मृत व्यक्ति के अंगों को एम्बुलेंस या विशेष वाहन बिना किसी रुकावट के तय स्थान तक पहुंच सके।

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