मध्य प्रदेशराज्य

4 माह की मासूम की मौत : कलेक्टर ने बैठाई जांच, तीन कर्मचारियों पर कार्रवाई

सतना, यश भारत।जिले के मझगवां क्षेत्र से आई 4 माह की बालिका की उपचार के दौरान हुई मौत के मामले में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस के निर्देश पर हुई संयुक्त जांच के बाद लापरवाही सामने आने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

 

जांच में कर्तव्य में लापरवाही पाए जाने पर महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक करूणा पाण्डेय और एएनएम विद्या चक्रवर्ती को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है। वहीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूजा पाण्डेय की सेवा समाप्ति के लिए कारण बताओ नोटिस दिया गया है। इसके अलावा जिले में अवैध रूप से इलाज कर रहे झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ भी प्रशासन ने वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शुक्ला और जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव सिंह की संयुक्त जांच रिपोर्ट के अनुसार, चित्रकूट थाना नयागांव अंतर्गत ग्राम पथरा (सुरांगी) निवासी विमला प्रजापति ने 21 दिसंबर 2025 को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मझगवां में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के समय दोनों बच्चों का वजन क्रमशः 2 किलो और 1.90 किलो था।

 

जांच में यह भी सामने आया कि दोनों बच्चों का टीकाकरण समय-समय पर पूरी तरह नहीं हो सका। 21 अप्रैल 2026 को दोनों बच्चों को उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायत के चलते सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मझगवां लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल सतना रेफर किया गया।

 

जिला अस्पताल में उपचार के दौरान बालिका प्रियांशी (सुप्रियांशी) की हालत बिगड़ गई। रीवा रेफर करने के दौरान ही उसकी मौत हो गई, जबकि उसका जुड़वा भाई नैतिक गंभीर हालत में रीवा मेडिकल कॉलेज में उपचाररत है।

झोलाछाप से इलाज बना बड़ा कारण

बच्चों की मां ने बताया कि पिछले 15 दिनों से दोनों बच्चों का इलाज गांव के एक झोलाछाप डॉक्टर से कराया जा रहा था। इसे भी घटना का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

 

पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं का रिकॉर्ड

जिला कार्यक्रम अधिकारी के अनुसार, आंगनवाड़ी केन्द्र के माध्यम से बच्चों और माता का पोषण ट्रैकर में पंजीयन किया गया था और टीकाकरण सहित अन्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई थीं। गर्भावस्था के दौरान महिला की सभी आवश्यक जांचें कराई गई थीं और खून की कमी होने पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी किया गया था।

जांच के निष्कर्षों के आधार पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी है। साथ ही अवैध रूप से इलाज करने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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