बांधगढ़ से पहुंचे हाथी के जोड़े ने रीवा और मऊगंज के जंगल में जमाया डेरा : वापस भेजने की कोशिश नाकाम; मॉनिटरिंग जारी

रीवा। फरवरी महीने से बांधगढ़ से पहुंचा हाथी का जोड़ा रीवा और मऊगंज के जंगल में डेरा जमाए हुए थे। दोनों जिलों के जंगल में ही आना जाना कर रहे थे। वन विभाग इनकी तकवारी में लगा हुआ था। इन्हें हालांकि वन विभाग वापस भेजने में लगा था। कई बार कोशिश की गई लेकिन हाथी का जोड़ा टस से मस नहीं हुआ। अब अचानक ही जोड़ा रीवा और मऊगंज के जंगलों से आगे बढ़ गया। वह इन जंगलों में विचरण करते करते ऊब गए। रीवा के गोविंदगढ़ के जंगल से होते हुए मैहर जिला के मुकुंदपुर जंगल तक पहुंच गए हैं। अब मैहर जिला के वन विभाग के अधिकारी मॉनीटरिंग में लगे हैं।
जानिए कब और किस दिन आए थे
मिली जानकारी के अनुसार बांधवगढ़ में हाथी भरत को झारखंड से रेस्क्यू कर लाया गया था और रखा गया था। बांधवगढ़ में ही भरत की दोस्ती एक हथनी से हुई। दोनों बांधवगढ़ से चलते चलते सोन नदी के किनारे से होते होते सीधी सीधी के चुरहट पहुंच गए। 25 फरवरी को हाथी का जोड़ा मऊगंज पहुंचा था। चुरहट से पहाड़ चढ़कर मऊगंज तक पहुंच गए। मऊगंज से हनुमना तक गए। पहले ऐसा लगा था कि हाथी का जोड़ा जिस रास्ते आया है। उसी रास्ते लौट जाएगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। दोनों ही मऊगंज और रीवा के जंगलों में दो महीनों तक डटे रहे।
सुबह छुहिया घाटी पार कर गए
हाथी के जोड़े को कई बार वन विभाग ने छुहिया घाटी पार कराने की कोशिश की। रास्ते का ट्रैफिक भी रोका गया। हालांकि हाथी आगे नहीं बढ़े थे। छुहिया घाटी से ही वापस लौट जाते थे। शनिवार को अचानक ही हाथी का जोड़ा सुबह सुबह आगे बढ़ गया। ट्रैफिक भी रोकना नहीं पड़ा। छुहिया घाटी सड़क पार कर पहाड़ चढ़ गया। इसके बाद गोविंदगढ़ के कुसमानिया जंगल से होते हुए मैहर तक पहुंच गया है।
हाथी का जोड़ा गोविंदगढ़ के जंगल से होते हुए मुकुंदपुर के जंगल तक पहुंच गया है। मुकुंदपुर रेंज अंतर्गत रामगढ़ सर्किल में ही फिलहाल इनकी लोकेशन ट्रैस की गई है। फिलहाल हाथियों का नया ढिकाना मुकुंदपुर का जंगल बन गया है। हालांकि मुकुंदपुर के जंगल तक इसके पहले भी हाथियों का झुंड पहुंच चुका है। संभावना यह है कि हाथी का जोड़ा भी यहां से लौट कर बांधवगढ़ की तरफ ही चला जाएगा।






