कटनीजबलपुरमध्य प्रदेश

जिले की 2.38 लाख से अधिक लाड़ली बहनों के खातों में अंतरित की 35.03 करोड़ रुपये से अधिक की राशि

 

जिले की 2.38 लाख से अधिक लाड़ली बहनों के खातों में अंतरित की 35.03 करोड़ रुपये से अधिक की राशि

कटनी,यशभारत। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज 04बुधवार को नरसिंहपुर जिले के गोटेगाँव में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम से लाड़ली बहना योजना के तहत कटनी जिले की 2 लाख 38 हजार 998 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 36वीं किस्त के तौर पर 35 करोड़ 3 लाख 50 हजार 800 रुपये की राशि का अंतरण किया।

जिले के कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यस्तरीय आयोजन के प्रसारण को लाड़ली बहनों ने देखा और सुना। इस दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास प्रतिभा पाण्‍डेय, सहायक संचालक वनश्री कुर्वेती सहित अन्य विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी रही।

लाड़ली बहना योजना की राशि का अंतरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा कटनी जिले की जनपद पंचायत बड़वारा की 39 हजार 328 पात्र महिलाओं के खाते में 5 करोड़ 76 लाख 79 हजार 200 रुपये अंतरित किये गए। इसी तरह जनपद पंचायत बहोरीबंद की 40 हजार 81 पात्र महिलाओं के खाते में 5 करोड़ 89 लाख 77 हजार 600 रुपये, जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा की 37 हजार 142 पात्र महिलाओं के खाते में 5 करोड़ 42 लाख 92 हजार 800 रुपये, जनपद पंचायत कटनी की 27 हजार 714 पात्र महिलाओं के खाते में 4 करोड़ 5 लाख 10 हजार 800 रुपये, जनपद पंचायत रीठी की 25 हजार 757 पात्र महिलाओं के खाते में 3 करोड़ 79 लाख 47 हजार 900 रुपये, जनपद पंचायत विजयराघवगढ़ की 34 हजार 813 पात्र महिलाओं के खाते में 5 करोड़ 11 लाख 90 हजार 500 रुपये अंतरित किये।

वहीं नगर निगम कटनी की 28 हजार 120 पात्र महिलाओं के खाते में 4 करोड़ 9 लाख 25 हजार 700 रुपये, नगर परिषद बरही की 2 हजार 297 पात्र महिलाओं के खाते में 33 लाख 80 हजार 700 रुपये, नगर परिषद कैमोर की 2 हजार 269 पात्र महिलाओं के खाते में 32 लाख 79 हजार 900 रुपये तथा नगर परिषद विजयराघवगढ़ की 1 हजार 477 पात्र महिलाओं के खाते में 21 लाख 65 हजार 700 रुपये अंतरित किये गए।

महिलाओं के जीवन में आया व्यापक परिवर्तन

मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना केवल आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना से महिलाओं के जीवन में व्यापक और सकरात्मक परिवर्तन आए है। नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं को घरेलू खर्चों के प्रबंधन ने अधिक आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक प्रभावी ढंग से खर्च कर पा रही है। योजना से प्राप्त राशि ने अनेक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्योगों और स्व-रोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया है। इससे उनकी आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित हुए है।

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