सुभाष चौक में जर्जर भवन तोडऩे में बड़ा खेल, सूची में नाम नहीं, तकनीकी सर्वेक्षण और नोटिस का भी अता-पता नहीं, फिर भी ढहाई इमारत, नगर निगम के इंजीनियरों और अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध

कटनी, यशभारत। नगर निगम द्वारा पिछले कुछ दिनों से शहर में स्थित जर्जर भवनों को गिराने की कार्यवाही की जा रही है। अब इस कार्यवाही में बड़ा खेल सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक नगर निगम के कतिपय इंजीनियरों की सांठगांठ से ऐसे भवनों को भी गिराया जा रहा है, जो जर्जर भवनों की सूची में शामिल नहीं है। जिससे नगर निगम के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहा है। ऐसा ही एक मामला शहर के हृदय स्थल सुभाष चौक में एक दशक पुराने भवन की प्रथम मंजिल को तोड़े जाने को लेकर सामने आया है। जानकारी के मुताबिक किसी भी जर्जर भवन को तोड़े जाने को लेकर नगर निगम प्रशासन द्वारा विधिवत तरीके से प्रक्रिया पूरी की जाती है। संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी किए जाते हैं और फिर इसके बाद उक्त जर्जर भवन को नोटिस जारी किए जाते हैं लेकिन सुभाष चौक स्थित भवन की प्रथम मंजिल को तोड़े जाने को लेकर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इस पूरे मामले में नगर निगम के इंजीनियर की भूमिका संदिग्ध है।
दो साल पहले की गई थी कार्रवाई
नगर निगम सूत्रों ने बताया कि सुभाष चौक स्थित इस भवन की प्रथम मंजिल को गिराए जाने की कार्यवाही दो साल पहले पूरी की जा चुकी थी। बताया जाता है कि उस समय प्रथम मंजिल की छत को गिराया गया था, इसके बाद भी कुछ हिस्सा बचा हुआ था। जिसे नगर निगम ने नहीं गिराया था। दो साल बाद अचानक जर्जर जर्जर भवनों को गिराए जाने की आड़ में बच हुए हिस्से को रातोंरात गिराया जाना कई सवालों को जन्म दे रहा है।
नियमों का भी पालन नहीं
नियमों की बात करें तो नगर निगम को ऐसे भवनों को तोडऩे का अधिकार है, जिसके अचानक गिरने से जनहानि हो सकती है। ऐसे भवनों को बिना कोई प्रक्रिया का पालन किए तोड़ा जा सकता है लेकिन सुभाष चौक स्थित जिस भवन को तोड़ा गया है, वह ऐसी स्थिति में नहीं था। इस भवन का तकनीकी सर्वेक्षण भी नहीं कराया गया, इसके बाद भी कतिपय लोगों द्वारा सांठगांठ करते हुए इस भवन को गिराया गया है।
सूची में आधा सैकड़ा से अधिक जर्जर भवन शामिल
नगर निगम आयुक्त के हवाले से दो दिन पहले एक आम सूचना जारी की गई है, जिसमे 57 भवन मालिकों के नाम शामिल करते हुए नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि आगामी वर्षा ऋतु को दृष्टिगत रखते हुए नगर निगम सीमांतर्गत स्थित अत्यंत प्राचीन, क्षतिग्रस्त एवं जर्जर भवनों का तकनीकी सर्वेक्षण कराया गया है। सर्वेक्षण के उपरांत चिन्हित किए गए भवन संरचनाएं अत्यधिक भयप्रद एवं जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पाई गई हैं, जो किसी भी समय धराशायी होकर जनहानि का कारण बन सकती हैं। मप्र नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की सुसंगत धाराओं के प्रावधानों के अंतर्गत उक्त भवनों के स्वामियों, अधिभोगियों को पूर्व में भी व्यक्तिगत नोटिस जारी कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई अथवा जर्जर भाग को हटाने के लिए निर्देशित किया गया था। कतिपय भवन स्वामियों द्वारा अब तक इस संबंध में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
7 दिन का दिया गया था समय
सूचना जारी होने के बाद भवन स्वामियों को 7 दिन का समय दिया गया था। जिसमे कहा गया था कि भवन स्वामी, अधिभोगी अपने जर्जर व भयप्रद भवन अथवा उसके खतरनाक भाग को स्वयं के व्यय पर सुरक्षित रूप से हटाएं। उसे इस प्रकार मरम्मत कराएं, जिससे आम जनमानस की सुरक्षा को कोई संकट न रहे। नियत समयावधि व्यतीत होने के उपरांत यदि किसी भी भवन स्वामी द्वारा सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो नगरप निगम द्वारा उक्त खतरनाक संरचनाओं को ढहाने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।







