जबलपुरमध्य प्रदेशराज्य

*सुपर स्पेशलिटी में हुआ वेरीकोज वेंस का ट्रीटमेंट:*     *दोनों मरीजों का चलना-फिरना मुश्किल हो गया था लेजर के माध्यम से हुआ सफल ऑपरेशन फिर छुट्‌टी दे दी गई* 

(इंडो वेन लेजर अबलेसन द्वारा हुआ इलाज, तुरंत मिल गई छुट्‌टी)*

 

*जबलपुर* मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में वेरीकोज वेंस का ट्रीटमेंट इंडो वेन लेजर अबलेसन के माध्यम से किया गया। इसमें मरीज के पैरों में एकत्रित रक्त के चलते गांठें बन गईं थीं। इससे पैर में दर्द रहता था। डॉक्टरों ने बिना चीरा या टांका लगाए, लेजर मशीन के एक पतले तार को खराब नसों में डालकर उसमें रक्त के प्रवाह को बंद कर दिया और मरीज को तुरंत छुट्‌टी दे दी।

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सीटीवीएस विभागाध्यक्ष डॉ. निमिष राय के मुताबिक बढ़ती उम्र के साथ नसें लचीलापन खो देती हैं। इसके चलते नसों में खिचाव पड़ जाता है। ऐसे में नसों का वाल्व कमजोर हो जाता है और दिल की ओर बढ़ने वाला रक्त उल्टी दिशा में बढ़ने लगता है। इस वजह से नसों में रक्त एकत्रित हो जाता है और नसें फूलकर वैरिकोज वेन्स बन जाती हैं।

*पैरों की नसों में आ गई थी सूजन*

 

वैरिकोज वेन्स में पैरों की नसों में सूजन आ जाती है, जिसके कारण चलना-फिरना तक मुश्किल हो जाता है। इसमें नसों का आकार बढ़ जाता है, जिससे वे नजर आने लगती हैं। वैरिकोज वेन्स त्वचा की सतह के नीचे उभरती हुई नीली नसें दिखती हैं। इसमें नसों का गुच्छा बन जाता है, यानी ये नसें सूजी और मुड़ी हुई होती हैं, जिसे स्पाइडर वेन्स भी कहते हैं।

 

*दोनों मरीजों का चलना-फिरना मुश्किल हो गया था*

 

सुपर स्पेशलिटी में इस बीमारी से पीड़ित दो मरीज भर्ती हुए थे। इसमें एक महिला थी और दूसरा बुजुर्ग था। दोनों के पैरों की नसें फूल गई थीं और उन्हें दर्द रहता था। चलने-फिरने में परेशानी थी। मुख्य रूप से यह बीमारी रहन-सहन के गलत तरीकों के कारण होती है। पर कुछ लोगों में यह आनुवांशिकी भी होती है। वेरीकोज वेंस के इलाज का मुख्य सिद्धांत है कि खराब खून की नलियों में रक्त का प्रवाह पूरी तरह से रोक दिया जाए।

 

*बिना चीरे या टांका के हुआ ऑपरेशन*

 

इंडो वेन लेजर अबलेसन ट्रीटमेंट में यह उपचार बिना चीरा या टांका के किया जाता है। लेजर मशीन के एक पतले तार को खराब नलियों में डालकर रक्त का प्रवाह बंद कर दिया जाता है। इलाज के तुरंत बाद मरीज घर जा सकता है। मरीज को बेहोश करने की जरूरत नहीं होती। दोनों मरीजों को डॉ. निमिष राय ने सुपर स्पेशलिटी के रेडियो डायग्नोसिस विभाग भेजा गया।

 

*एमपी का पहला ऐसा सुपरस्पेशलिटी जहां डायग्नोसिस और उपचार उपलब्ध*

 

विभागाध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में डॉ नरेंद्र पटेल के द्वारा इलाज की व्यवस्था बनाई गई। दोनों मरीजों को रेडियोलॉजी विभाग के अंतर्गत सीटीवीएस वार्ड में भर्ती किया गया। सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉक्टर वायआर यादव और अधीक्षक सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल डॉक्टर जितेंद्र गुप्ता द्वारा इलाज के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई गई।

 

दोनों मरीजों का लेजर के माध्यम से ऑपरेशन हुआ और फिर छुट्‌टी दे दी गई। वर्तमान समय में मेडिकल कॉलेज जबलपुर का रेडियो डायग्नोसिस विभाग मध्य प्रदेश का पहला ऐसा विभाग है, जो स्वयं की विभाग के अंतर्गत मरीजों को भर्ती कर डायग्नोसिस और उपचार कर रहा है।

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