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सीएम बनने के बाद कोई भूमि नहीं खरीदी डॉ मोहन यादव ने, प्रदेश प्रवक्ता संदीप जायसवाल बोले – जनसेवी मुख्यमंत्री की छवि खराब करने की कोशिश

मुख्यमंत्री की लोकप्रियता से घबराई कांग्रेस का मिथ्या आरोप

भोपाल, यशभारत। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के स्वामित्व की कृषि भूमि में उनके सीएम बनने के बाद हुई वृद्धि संबंधी मीडिया में आ रही जानकारियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता, मुड़वारा कटनी के विधायक संदीप जायसवाल ने कहा है कि कांग्रेस मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की लोकप्रियता और उनकी विकासवादी सोच से घबराकर अनर्गल आरोप लगा रही है। पिछड़े वर्ग के मुख्यमंत्री की छवि खराब करने की कोशिश कभी सफल नहीं होने वाली। श्री जायसवाल ने कहा कि सीएम बनने के बाद डॉ मोहन यादव की कृषि भूमि में कोई वृद्धि नहीं हुई है। समाचारों में तथ्यों को गलत ढंग से पेश कर और रिश्तेदारों की स्वतंत्र गतिविधियों को जोड़कर भ्रम की स्थिति निर्मित करने का प्रयास किया गया है। उपलब्ध अभिलेखों और सार्वजनिक तथ्यों से स्पष्ट है कि सीएम और उनकी पत्नी एवं परिवार की अधिकांश भूमि उनके मुख्यमंत्री बनने के पूर्व की है। 2023 के बाद डॉ मोहन यादव, उनकी पत्नी या बेटे द्वारा कोई ऐसी जमीन नहीं खरीदी गई है। कांग्रेस मिथ्या आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करना चाहती है।

प्रदेश प्रवक्ता विधायक संदीप जायसवाल ने कहा कि डॉ. मोहन यादव की संपत्तियों का पूरा विवरण विधानसभा निर्वाचन 2023 के शपथ-पत्र में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। किसी भी प्रकार के पद के दुरुपयोग अथवा हितों के टकराव का आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस में 23 जून 2026 को प्रकाशित समाचार के संबंध में वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नवंबर 2023 में उनके स्वामित्व एवं आधिपत्य की कुल कृषि भूमि 17.967 एकड़ थी, जो जून 2026 में भी 17.967 एकड़ ही है। जो पूर्व से ही चुनावी हलफनामें में घोषित है। श्रीमती सीमा यादव की कृषि भूमि भी लगभग यथावत है। नवंबर 2023 में उनके पास 12.287 एकड़ कृषि भूमि थी, जो जून 2026 में 12.292 एकड़ है। अधिकांश भूमि डॉ. मोहन यादव जी के मुख्यमंत्री बनने से काफी पहले, वर्ष 2008 से 2019 के बीच खरीदी गई थी।

बयान में कहा गया है कि सिद्धि विनायक देवकॉन प्राइवेट लिमिटेड के संबंध में भ्रामक प्रस्तुति की गई है। यह कंपनी वर्ष 2008 में कृषि कार्यों के लिए स्थापित हुई थी। डॉ. मोहन यादव एवं श्रीमती सीमा यादव वर्ष 2017 में ही इसके निदेशक पद से अलग हो चुके थे तथा मार्च 2026 में अपने सभी शेयर भी त्याग चुके हैं। कंपनी के पास नवंबर 2023 में 68.43 एकड़ भूमि थी, जो जून 2026 में घटकर 65.69 एकड़ रह गई है। पुत्र वैभव यादव द्वारा खरीदी गई भूमि मुख्यमंत्री बनने से पहले खरीदी गई थी। बताया गया है कि ग्राम सांवरखेड़ी में 2019 से मार्च 2023 के बीच 16.38 एकड़ कृषि भूमि का क्रय किया गया था। यह खरीद मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने तथा उज्जैन मास्टर प्लान-2035 लागू होने से पहले की गई थी। इसी तरह पुत्रवधू श्रीमती शालिनी यादव द्वारा खरीदी गई भूमि मास्टर प्लान क्षेत्र के बाहर कृषि भूमि है। । यह भी जानकारी दी गई है कि वर्ष 2025 में ग्राम गंगेड़ी में खरीदी गई लगभग 10 एकड़ भूमि कृषि भूमि है तथा विकसित या व्यावसायिक क्षेत्र में नहीं आती।

सीएम बनने के पहले लागू हो गया था उज्जैन का मास्टर प्लान

स्पष्ट किया गया है कि रिश्तेदार स्वतंत्र इकाइयाँ हैं। मुख्यमंत्री के रिश्तेदार अपने-अपने व्यवसाय एवं आर्थिक गतिविधियाँ स्वतंत्र रूप से संचालित करते हैं। उनके किसी भी निजी लेन-देन या व्यवसाय को मुख्यमंत्री से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से गलत है। उज्जैन मास्टर प्लान-2035 मुख्यमंत्री बनने से पहले लागू हो चुका था। यह मास्टर प्लान मई 2023 से प्रभावशील है, जबकि डॉ. मोहन यादव ने 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद ग्रहण किया। अतः सड़क, हाईवे या विकास योजनाओं को मुख्यमंत्री बनने के बाद विशेष रूप से प्रभावित करने का आरोप निराधार है।IMG 20260625 WA0837IMG 20260625 WA0760IMG 20260625 WA0748

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