सीएम ने किए पूज्य दद्दाजी जी की प्रतिमा के दर्शन, पूजन कर मंदिर परिसर का किया अवलोकन, डॉ मोहन यादव ने कहा – दद्दाजी ने समाज को दिया अध्यात्म और परोपकार का संदेश

कटनी, यशभारत। प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अब से कुछ देर पहले दद्दाधाम पहुंचकर परम पूज्य गुरुदेव पंडित देवप्रभाकर शास्त्री दद्दाजी की प्रतिमा के दर्शन किए तथा विधिवत् मंत्रोच्चार के बीच पूजन किया। उन्होंने नव निर्मित मंदिर परिसर का भी अवलोकन किया और मंदिर की भव्यता की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने दद्दाजी के समाधि स्थल पर पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने इस दौरान कहा कि पूज्य दद्दाजी ने जगत के कल्याण के लिए धर्म का रास्ता दिखलाया। उन्होंने समाज को अध्यात्म का मार्ग दिखाते हुए परोपकार की भावना से जीवन जीने की प्रेरणा दी। ऐसे संत सदियों में एक बार जन्म लेते हैं। उन्होंने इस दौरान मौजूद अनिरुद्धाचार्य जी और स्वामी इंद्रेश महाराज का भी अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री के साथ जिले के प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, सांसद वीडी शर्मा सहित अन्य नेता मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि शिरडी और दूसरे तीर्थ स्थलों की तरह कटनी का दद्दा धाम प्रसिद्ध हो इसके प्रयास किए जाएंगे। सरकार युवाओं में हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों पर भी एक प्रतियोगिता पूरे प्रदेश में आयोजित करने जा रही है और इसकी शुरुआत प्रमुख हिन्दू धर्म के मुख्य धर्मग्रंथ श्रीमद भागवत गीता से की जा रही है। आने वाले समय में पूरे प्रदेश में श्रीमद भागवत गीता पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। इससे युवाओं में अपने धर्म ग्रंथों को जानने का अवसर मिलेगा। इसके पहले आज दोपहर दद्दाजी की प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा विशेष रूप से उपस्थित रहे। दोनों ने श्रद्धा के साथ दद्दा जी की समाधि स्थल पर मत्था टेका और उनके आशीर्वाद की कामना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-समाज एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कल शाम वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश महाराज ने दिव्य कथा के माध्यम से गुरु महिमा और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। महाराज जी ने कहा कि दद्दा जी श्रेष्ठ गुरु हैं, जिनकी कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। उन्होंने कहा, “गुरु कृपा से ही सब कुछ संभव है।” महाराज जी के अनुसार, हर किसी में दोष देखने का भाव राक्षसी प्रवृत्ति है, जबकि जब हमारी दृष्टि में गुण-दर्शन का भाव प्रकट हो जाए, तो समझना चाहिए कि भगवत कृपा प्राप्त हो चुकी है। कथा, सत्संग और हरिनाम संकीर्तन के साथ पूरे दद्दा धाम में भक्ति, गुरु कृपा और आनंद का दिव्य वातावरण व्याप्त रहा।








