विधानसभा सत्र से पूर्व कांग्रेस का बड़ा दांव: 230 सीटों पर 33% महिला आरक्षण और OBC कोटे को लेकर आर-पार की जंग

यश भारत (स्पेशल डेस्क)/मध्य प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र के आगाज से पहले सूबे की सियासत की बिसात बिछ चुकी है। आज नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निवास पर आयोजित कांग्रेस विधायक दल की बैठक में मुख्य विपक्षी दल ने प्रदेश की सत्तासीन भाजपा सरकार को घेरने के लिए एक बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ खेला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की उपस्थिति में हुई इस रणनीतिक बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कांग्रेस आज सदन में प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर महिलाओं को तत्काल 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव लाकर सरकार की घेराबंदी करेगी।
बैठक में जीतू पटवारी और उमंग सिंघार ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अब केवल जुबानी दावों पर भरोसा नहीं करेगी, बल्कि सदन के भीतर सीधी कार्रवाई की मांग करेगी। कांग्रेस का तर्क है कि यदि सरकार वास्तव में महिला सशक्तिकरण की पक्षधर है, तो उसे 230 सीटों पर बिना किसी देरी के 33% आरक्षण लागू करने के कांग्रेस के प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए। इस निर्णय के बाद राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है, क्योंकि कांग्रेस इसे एक विधायक दल के संकल्प के रूप में सदन के पटल पर रखने जा रही है।
दिग्गजों का जमावड़ा और एकजुटता का संदेश
नेता प्रतिपक्ष के निवास पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में एकजुटता का अभूतपूर्व प्रदर्शन देखने को मिला। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे, पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया और सोहन बाल्मीकि सहित सभी सम्मानित विधायकगण मौजूद रहे। घंटों चली इस चर्चा में रणनीति तैयार की गई कि कैसे सदन के भीतर सरकार के ‘महिला प्रेम’ के दावों की हवा निकाली जाए और आधी आबादी के राजनीतिक हक की लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर लाया जाए।
सचिन यादव का प्रहार: महिला आरक्षण के साथ ‘OBC हक’ की पुरजोर मांग
इसी कड़ी में पूर्व कृषि मंत्री एवं विधायक सचिन यादव ने भोपाल में मीडिया से मुखातिब होते हुए सरकार की मंशा पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस और समूचे विपक्ष ने वर्ष 2023 में ही संसद में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” को पारित करने में सहयोग दिया था, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे लागू करने के बजाय तकनीकी पेंच फंसाकर रोकने का काम किया है। यादव ने आक्रामक अंदाज में मांग उठाई कि महिला आरक्षण के भीतर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए भी राजनीतिक आरक्षण का प्रावधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि देश की सबसे बड़ी आबादी यानी ओबीसी वर्ग को शामिल किए बिना महिला सशक्तिकरण की यह पहल अधूरी और बेमानी है।
सदन में हंगामे के आसार: अग्निपरीक्षा के दौर में सरकार
विशेष सत्र से ठीक पहले कांग्रेस का यह तेवर साफ करता है कि विपक्षी दल इस बार पूरी तरह आक्रामक और एकजुट है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह सामाजिक न्याय की इस लड़ाई को सड़क से सदन तक मजबूती से लड़ेगी। अब सबकी निगाहें विधानसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां कांग्रेस इन ज्वलंत मुद्दों को उठाकर सरकार की मंशा और उसके महिला व पिछड़ा वर्ग के प्रति संवेदनशीलता के दावों की अग्निपरीक्षा लेने के लिए तैयार है।







