यशभारत खास: कोविड में छूटा पिता का साया, बेटा नहीं था तो दो बेटियों ने किया पिंडदान, पितृपक्ष में गयाजी पहुंचकर पिता की आत्मा की शांति के लिए किया विधि-विधान से कर्मकांड
चार वेदियों पर एक ही दिन में पूरी की पिंडदान की प्रक्रिया

कटनी, यशभारत। कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने परिवारों से अपनों को छीनकर ऐसी पीड़ा दी, जिसकी टीस आज भी कायम है। ऐसी ही एक मार्मिक कहानी कटनी की बेटी और वर्तमान में जबलपुर में रहने वाली तनुजा श्रीवास्तव की है। कोविड संक्रमण के दौरान पति अरविन्द श्रीवास्तव को खोने के बाद इस बार पितृपक्ष में तनुजा अपनी दोनों बेटियों विश्वाची और वेदांशी के साथ गयाजी पहुंचीं। परिवार में बेटा नहीं था, लेकिन बेटियों ने इस कमी को कभी आड़े नहीं आने दिया। दोनों ने आगे बढ़कर पिता के प्रति अपना फर्ज निभाया और मोक्षभूमि गयाजी में विधि-विधान से उनका पिंडदान किया।
तनुजा श्रीवास्तव ने यशभारत को बताया कि उनके पति अरविन्द श्रीवास्तव का निधन कोरोना की दूसरी लहर के दौरान कोविड संक्रमण के कारण हुआ था। पति को खोने के बाद परिवार के लिए यह बेहद कठिन और भावुक समय रहा। पितृपक्ष में उन्होंने अपनी दोनों बेटियों के साथ गयाजी पहुंचकर दिवंगत पति की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना से पिंडदान का संकल्प लिया।
तनुजा और उनकी दोनों बेटियों ने एक ही दिन में गयाजी की चार प्रमुख वेदियों—फल्गु, विष्णुपद, अक्षयवट और सीताकुंड—पर विधि-विधान से कर्मकांड पूरा किया। सर्वप्रथम फल्गु नदी में पिंड अर्पित किया गया। इसके बाद विष्णुपद मंदिर के गर्भगृह में पहुंचकर भगवान श्रीविष्णु के पावन चरणों के दर्शन किए और परिवार की सुख-शांति तथा दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। चारों वेदियों पर कर्मकांड पूरा करने के बाद बेटियों ने अपने पिता को श्रद्धापूर्वक पिंड अर्पित किया और उनके मोक्ष की कामना की। मां के साथ बेटियों द्वारा निभाए गए इस दायित्व का क्षण परिवार के लिए बेहद भावुक रहा।
बेटियां भी निभा सकती हैं माता-पिता के प्रति अपना फर्ज
इस प्रसंग को लेकर पंडित रामभूषण द्विवेदी काजू महाराज ने कहा कि बेटा नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि माता-पिता के प्रति बेटियां अपना दायित्व नहीं निभा सकतीं। बेटियां भी अपने माता-पिता के प्रति उतनी ही श्रद्धा, जिम्मेदारी और भाव रखती हैं। उन्होंने बताया कि परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेटियां भी अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान एवं संबंधित कर्मकांड कर सकती हैं। पितृपक्ष के दौरान देशभर से श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर गयाजी पहुंच रहे हैं। इसी बीच तनुजा की दोनों बेटियों द्वारा पिता का पिंडदान किया जाना श्रद्धा, संवेदना और बदलते सामाजिक नजरिए की एक मार्मिक मिसाल बन गया। कर्मकांड पूरा करने के बाद दोनों बेटियां अपनी मां के साथ वापस लौट गईं।








