मध्य प्रदेशराज्य

मंडला में 23 दिन के दौरान 61 फ़ीसदी वर्षा दर्ज :7 लोगों की मौत, 2 लापता; 210 गांवों में भरा पानी, 305 मकान क्षतिग्रस्त

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मंडला lजिले में 18 जून से अब तक 810 मिमी यानी 31.87 इंच बारिश हो चुकी है। यह वार्षिक औसत 1326.2 मिमी (52.21 इंच) का 61 प्रतिशत है। बाढ़ की चपेट में आए 210 गांवों में जनजीवन अस्त-व्यस्त है। नदी-नालों को पार करते समय बहे 9 में से 7 लोगों की मौत हो चुकी है। 2 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश में एसडीईआरएफ की टीमें लगी हैं।बिछिया, बीजाडांडी, नारायणगंज, निवास और मंडला क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। बिछिया के अंजनिया, माधोपुर, मरारटोला, करियागांव, जगन्नाथ, भलवारा और बीजाडांडी के बरौची, पीपलधर, तुमती, विजयपुर गांवों में बड़ा नुकसान हुआ है।

276 मकानों को नुकसान, 29 पूरी तरह से ढहे

कुल 276 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इनमें निवास में 23, नारायणगंज में 63, मंडला में 92, घघरी में 10, बिछिया में 51 और नैनपुर में 37 मकान शामिल हैं। इसके अलावा 29 मकान पूरी तरह से ढह गए हैं। इनमें नारायणगंज के 16, मंडला के 2, बिछिया के 6 और नैनपुर के 6 मकान हैं। नारायण गंज के डूब क्षेत्रों में पानी मकानों, गोशालाओं और घरेलू सामान में घुस गया है। इससे लोगों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। प्रभावित परिवारों के सामने रहने की स्थायी व्यवस्था का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है।

242 लोगों को सुरक्षित ठिकानों में रखकर भोजन आदि दे रहे

प्रशासन ने जिले के करीब 7 बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित ठिकानों में शिफ्ट किया है। नारायण गंज के कॉन्ड्रा चौकी नाले में बाढ़ की वजह से 65 लोगों को बालक छात्रावास में, भावल के सौंधर के महोदर नाला में बाढ़ आने से 22 लोगों को प्राथमिक शाला भवन में, चन्देहरा के शंकरगंज में बलई नदी में बाढ़ की वजह से 35 लोग प्रभावित हैं। नैनपुर की थांवर नदी में बाढ़ की वजह से एफसीआई गोदाम में 40 और कन्या शाला में 80 लोगों रखा गया है। इस तरह इन 242 लोगों को प्रशासन द्वारा बाढ़ में डूबे क्षेत्र से सुरक्षित ठिकानों में रखकर भोजन आदि की व्यवस्था की जा रही है।

खड़देवरा यहां 9 परिवारों के 19 लोग नाले में आई बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें से 2 परिवार पंचायत भवन में रह रहे हैं, जबकि अन्य रिश्तेदारों के घरों में शरण लिए हैं। पंचायत ने गैस चूल्हा और अनाज की व्यवस्था की गई है। ग्रामीण संतोष ठाकुर ने नाले में अतिक्रमण को बाढ़ का कारण बताया और प्रशासन से इसकी सफाई की मांग की।तुलाराम भेना ने कहा कि उनका मिट्टी का घर बाढ़ में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। अब रहने की जगह नहीं बची। सीताराम का कहना था कि उनका मकान ढह गया। सामान दब गया। मवेशी खुले में हैं। उन्होंने नए निर्माणों को नाले की निकासी बाधित करने का जिम्मेदार ठहराया।पांचवीं कक्षा की छात्रा रुपाली भेना ने कहा कि स्कूल की छुट्टियां हैं, लेकिन उसे घर की याद सता रही है। छठी कक्षा की करीना ठाकुर ने बताया कि वह अपनी बुआ के घर रह रही है, लेकिन गांव और स्कूल में पानी भरा होने के कारण डर है कि बाढ़ और बढ़ सकती है। पंचायत सचिव लोकू लाल वरकड़े का कहना है कि 38 परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं। मकानों व सामान को भारी नुकसान हुआ है।

25 लोगों को पंचायत भवन में शिफ्ट किया गया 

औघटखपरी : यहां 10-12 परिवारों के 25 लोगों को पंचायत भवन में शिफ्ट किया गया है। बाढ़ प्रभावित मदन ने बताया कि भोजन और रहने की व्यवस्था की गई है। उपसरपंच सुदीप रावत ने कहा कि कॉलोनी क्षेत्र में नाला उफान पर है, और बाढ़ का पानी कम होने के बावजूद बारिश की आशंका बनी हुई है। प्रभावित लोगों को स्थिति सामान्य होने तक पंचायत भवन में रखा जाएगा।होमगार्ड डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट नरेश साहू का कहना है कि एक सप्ताह से जिले भर में भारी बारिश हो रही है। इसकी वजह से नर्मदा और अन्य नदियां उफान पर रही हैं। पिछले दिनों बाढ़ में फंसे मरार टोला में 5 लोगों को, नैनपुर की समृद्धि कॉलोनी से 5 लोगों को और जगनाथर से 20 लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि आगे भी बाढ़ और बारिश की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और बचाव के व्यापक इंतजाम हैं। थाना क्षेत्रों में डीआरसी टीम में 4-4 जवान हैं। रिजर्व में 9-9 जवानों की तीन टीमें हैं। मंडला में 3 और घुघरी, नैनपुर एवं टिकरिया में 1-1 मोटर बोट स्थापित है।

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