मध्य प्रदेशराज्य

दवा खरीदी का खेल : शिकायत के बाद टीम गठित, एक साल का रिकार्ड मांगा 

रीवा। श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में दवा खरीदी का खेल पहले से चल रहा था। लोकल पर्चेज के नाम पर अमृत फार्मेसी से दवाइयां कई गुना महंगी दरों पर खरीदी गई। इसकी शिकायत कमिश्नर रीवा संभाग रीवा से की गई। शिकायत के बाद कमिश्नर ने जेडी कोष एवं लेखा को पत्र जारी कर टीम गठित करने के आदेश दिए। जेडी ने टीम भी गठित कर दी। टीम के सदस्य श्याम शाह मेडिकल कॉलेज पहुंचे। पहले दिन हालांकि ज्यादा जांच पड़ताल नहीं चली। टीम के सदस्य सीधे स्टोर कक्ष पहुंचे। उन्होंने मेमो दे दिया है। उन्होंने एक साल का रिकार्ड मांगा है। सारे दस्तावेजों के साथ ही किन नियमों के तहत खरीदी की गई है। उसके दस्तावेज भी तलब किए गए हैं।

बिना टेंडर के दवाइयां खरीदने की शिकायत

शिकायतकर्ता समस्त निविदाकार हैं। इन्होंने शिकायत में दवाइयों का जिक्र किया है। जिन दवाइयों की खरीदी अमृत फार्मेसी से महंगी दरों पर की गई हैं। उनका नाम और दर भी लिखकर शिकायत की गई है। इसके अलावा वह कितने में मिल सकती थी, यह भी बताया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह खरीदी नियम विरुद्ध की गई है। बिना टेंडर निकाले ही करोड़ो रुपए की दवाइयां महंगी दरों पर लोकल पर्चेज के नाम पर खरीद ली गई। इससे शासन को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। इस मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।

टीम में यह रहे शामिल

जेडी कोष एवं लेखा से पांच लोगों को जांच के लिए भेजा गया है। इसमें सहायक संचालक अभयराज सिंह, समीर श्रीवास्तव हैं। इसके अलावा असिस्टेंट इंटरनल ऑडीटर मनीष कुमार त्रिपाठी, श्यामराज सिंह, के अलावा एक अन्य कर्मचारी शामिल रहे। टीम ने कई घंटे कॉलेज में बिताए। दस्तावेज मांगे हंैं, अब मंगलवार से जांच आगे बढ़ेगी।

 

जीसी की बैठक में लोकल पर्चेज पर रोक लगाई गई थी। इसके बाद भी डीन ने पहले ही नियम तोड़ दिया था। करोड़ों रुपए की दवाइयां अमृत फार्मेसी से खरीदी थी। मामला सामने आने के बाद हालांकि विभाग के मंत्री ने ही स्वीकृति दे दी थी लेकिन पाबंदी को रेग्युलर नहीं किया गया था। एक बार मिले मौके को फिर भुनाया गया। इसकी शिकायत हुई है। नियमों की भी जानकारी टीम ने मांगी है। ऐसे में डीन की मुश्किलें बढऩा तय माना जा रहा है।

सीएमएचओ ने भी की लाखों की दवा खरीदी, लेकिन सेफ हैं

दवा खरीदी का गोरखधंधा सिर्फ मेडिकल कॉलेज में नहीं है। स्वास्थ्य विभाग में भी लाखों की दवाइयां लोकल पर्चेज के नाम पर खरीदी गईं। जैम पोर्टल से पसंदीदा फर्मों को आर्डर देकर नियम विरुद्ध तरीके से दवाइयों की खरीदी गई की और उन्हें भुगतान भी कर दिया गया। इस पूरे खेल में सभी अधिकारी, कर्मचारी संलिप्त हैं। यही वजह है कि क्षेत्रीय संचालक ने चार सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। 1 सप्ताह में जांच रिपोर्ट मांगी थी। आज तक जांच पूरी नहीं हो पाई। अब इस जांच का क्या हश्र होता है, यह देखने वाली बात होगी।

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