डॉक्टरों ने महिला को दी नई जिंदगी : बीएमसी में गंभीर एनीमिया से पीड़ित प्रसूता को निकाला मौत के मुंह से बाहर

सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय (बीएमसी) के एनेस्थीसिया आईसीयू की सजगता और डॉक्टरों की त्वरित कार्यकुशलता से जानलेवा स्थिति में फंसी एक प्रसूता को नया जीवन मिला है। अत्यधिक रक्तअल्पता (एनीमिया) और ‘प्लेसेंटा प्रीविया’ जैसी गंभीर चिकित्सीय स्थिति से जूझ रही मछरयाई निवासी शकीला बानो को बीएमसी की विशेषज्ञ टीम ने वेंटिलेटर सपोर्ट और पीआरबीसी (PRBC) थैरेपी के जरिए मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
तीसरी बार गर्भवती शकीला बानो प्लेसेंटा प्रीविया से पीड़ित थीं, जिसमें आंवल गर्भाशय के मुख पर आ जाने के कारण अचानक अनियंत्रित और अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) होने का खतरा रहता है। पूर्व में भी एनीमिया के कारण बीएमसी में भर्ती हो चुकीं शकीला बानो को हाल ही में दोबारा तीव्र ब्लीडिंग होने पर क्रिटिकल हालत में अस्पताल लाया गया। यहाँ स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के डॉक्टरों ने केस की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्परता से उनका जटिल ऑपरेशन संपन्न कराया।
ऑपरेशन के बाद प्रसूता की बेहद नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. सर्वेश जैन के मार्गदर्शन में तुरंत एनेस्थीसिया आईसीयू में शिफ्ट कर वेंटिलेटर पर लिया गया। कंसल्टेंट इंचार्ज डॉ. अजय सिंह एवं पीजी डॉक्टर रजत ने केस को क्रिटिकली मैनेज करते हुए मरीज को बीएमसी के सेपरेटर से तैयार पीआरबीसी (केवल लाल रक्त कणिकाएं) की कई यूनिट चढ़ाईं। डॉक्टरों की लगातार मॉनिटरिंग और सटीक उपचार के बल पर महिला की हालत में तेजी से सुधार हुआ है। अब उन्हें वेंटिलेटर से हटा लिया गया है और वे पूरी तरह खतरे से बाहर हैं।
उल्लेखनीय है कि देश में लगभग पचास प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से प्रभावित होती हैं। ऐसे में बीएमसी में उपलब्ध आधुनिक क्रिटिकल केयर, एनेस्थीसिया आईसीयू और वेंटिलेटर सुविधाओं ने एक बार फिर साबित किया है कि अत्यंत विकट परिस्थितियों में भी समय पर मिला जीवनरक्षक इलाज अमूल्य जिंदगियां बचा सकता है।







