झोलाछाप डॉक्टरों का जाल: स्टाफ की कमी बनी कार्रवाई में सबसे बड़ी बाधा

दमोह। जिले में बिना डिग्री के इलाज करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों की गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। शहर से लेकर गांवों तक ऐसे कथित डॉक्टर धड़ल्ले से क्लीनिक संचालित कर रहे हैं और मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर कार्रवाई जरूर करता है, लेकिन इन कार्रवाइयों का असर जमीनी स्तर पर नजर नहीं आता। कुछ दिन क्लीनिक बंद रहने के बाद ये झोलाछाप फिर से सक्रिय हो जाते हैं और पहले की तरह इलाज शुरू कर देते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां योग्य डॉक्टरों की कमी का फायदा उठाकर ये लोग अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बार शिकायत के बावजूद भी स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।
जब इस संबंध में दमोह के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राजेश अठया से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि विभाग कार्रवाई करता है, लेकिन स्टाफ की कमी एक बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के चलते लगातार निगरानी और कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक झोलाछाप डॉक्टरों का यह खेल चलता रहेगा और कब प्रशासन इस पर सख्ती से लगाम कस पाएगा?
मरीजों की सुरक्षा को लेकर अब ठोस और स्थायी कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है।







