जल गंगा संवर्धन अभियान बना जनआंदोलन, कागजों में उपलब्धि—जमीनी हकीकत सवालों के घेरे में
कटनी में 3 हजार से अधिक कार्य पूर्ण होने का दावा, लेकिन शहर से लगे ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में जलस्रोतों की हालत चिंताजनक

जल गंगा संवर्धन अभियान बना जनआंदोलन, कागजों में उपलब्धि—जमीनी हकीकत सवालों के घेरे में
कटनी में 3 हजार से अधिक कार्य पूर्ण होने का दावा, लेकिन शहर से लगे ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में जलस्रोतों की हालत चिंताजनक

कटनी, यशभारत।
कभी सूख चुके तालाबों की तलहटी को फिर से जीवन देने, पुराने कुओं-बावड़ियों को पुनर्जीवित करने और खेतों तक सिंचाई की उम्मीद पहुंचाने का दावा करने वाला ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ 2026 अब जिले में एक बड़े जनआंदोलन के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार यह अभियान जनभागीदारी से सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं अलग तस्वीर पेश कर रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप तथा जिले में कलेक्टर आशीष तिवारी, सीईओ सिमरन हरप्रीत कौर, शहर में निगमायुक्त तपस्या परिहार के निर्देशन में चल रहे इस अभियान के तहत अब तक जिले में 4,146 कार्यों में से 3,012 कार्य पूर्ण होने का दावा किया गया है। इनमें खेत तालाब, कुआं पुनर्भरण, जल संरक्षण संरचनाएं और वाटरशेड विकास जैसे कार्य शामिल बताए जा रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि यह अभियान जल संरक्षण को नई दिशा दे रहा है और ग्रामीण अंचलों में जल संरचनाओं का पुनर्जीवन हो रहा है। पंचायत, राजस्व, जल संसाधन सहित 14 विभागों की संयुक्त भागीदारी से कार्यों को गति दी जा रही है।
हालांकि दूसरी ओर वास्तविक स्थिति पर नजर डालें तो जिले के कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्र अब भी उपेक्षा का शिकार हैं। शहर से लगे गांव चाका, कन्हवारा, डीठवारा, मझगवां, केलवारा कला सहित वार्ड क्रमांक 1 से 5 तक के शहरी क्षेत्र पुरैनी, कुठला और कुशवाहा नगर से निकली कोहारी नदी में जल संरक्षण के ये दावे धरातल पर दिखाई नहीं देते।
इन क्षेत्रों में तालाब, कुएं और अन्य जलस्रोत लगातार बदहाल स्थिति में पहुंचते जा रहे हैं। कई स्थानों पर न तो सफाई हुई है और न ही पुनर्जीवन के कोई ठोस प्रयास दिखाई देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं की घोषणाएं तो खूब होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जलस्रोतों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यदि समय रहते इन जलस्रोतों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में पानी की समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
इधर प्रशासन जहां अभियान को सफल और ऐतिहासिक बता रहा है, वहीं आमजन के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह अभियान केवल आंकड़ों तक सीमित रह गया है?
नागरिकों का मानना है कि जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण अभियान में यदि वास्तविक स्थल पर कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी मजबूत नहीं होगी तो इसके दीर्घकालिक परिणाम अपेक्षित नहीं मिल पाएंगे।
इस बीच ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत बहोरीबंद के मंगेला गांव में दीवार लेखन के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश भी दिया गया, जहां “जल है तो कल है” जैसे नारों से लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया।







