गर्मी में पानी की जंग: टंकियां खड़ी, पाइपलाइन बिछी… फिर भी प्यासा है कटनी
जल जीवन मिशन के दावों के बीच गांवों में बूंद-बूंद को तरस रहे लोग, महिलाएं अब भी हैंडपंप और कुओं के भरोसे

गर्मी में पानी की जंग: टंकियां खड़ी, पाइपलाइन बिछी… फिर भी प्यासा है कटनी
जल जीवन मिशन के दावों के बीच गांवों में बूंद-बूंद को तरस रहे लोग, महिलाएं अब भी हैंडपंप और कुओं के भरोसे

कटनी, यशभारत। एक तरफ सरकारी फाइलों में “हर घर जल” के दावे पूरे हो रहे हैं, दूसरी तरफ कटनी के गांवों में लोग आज भी पानी की एक-एक बूंद के लिए जंग लड़ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कहीं करोड़ों की टंकियां खड़ी हैं, कहीं पाइपलाइन जमीन के नीचे दौड़ रही है, लेकिन नलों में पानी नहीं—सिर्फ हवा आ रही है।
सुबह होते ही जिले के कई गांवों में महिलाओं की कतारें हैंडपंप और कुओं पर लग जाती हैं। हाथों में बाल्टियां, सिर पर मटके और चेहरे पर चिंता—यही “जल जीवन मिशन” की जमीनी तस्वीर बन चुकी है। गर्मी बढ़ते ही पानी का संकट और गहरा गया है, लेकिन जिम्मेदार दावों और आंकड़ों में व्यस्त नजर आते हैं।
जिले के 893 गांवों में जल जीवन मिशन के तहत काम चल रहा है। 687 गांवों में योजनाएं स्वीकृत हैं, लेकिन करीब 165 योजनाएं अब भी अधूरी पड़ी हैं। रिकॉर्ड में 482 गांवों में काम पूरा दिखाया जा रहा है, मगर “हर घर जल” का प्रमाण सिर्फ 291 गांवों को ही मिल पाया है। सवाल यह है कि अगर योजनाएं पूरी हैं, तो गांवों के नल सूखे क्यों हैं?
गांवों में हालात इतने खराब हैं कि कई जगह लोग आज भी एक से दो किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं। कहीं हैंडपंप खराब पड़े हैं, कहीं बिजली नहीं होने से टंकियां खाली हैं, तो कहीं पाइपलाइन बिछने के बाद भी घरों तक कनेक्शन नहीं पहुंचे। जिले में करीब 593 हैंडपंप बंद या अनुपयोगी बताए जा रहे हैं, जिससे संकट और बढ़ गया है।
सबसे ज्यादा नाराजगी उन गांवों में है जहां टंकी तो बन गई, लेकिन पानी सप्लाई शुरू ही नहीं हुई। कई जगहों पर पूरा सिस्टम तैयार होने के बावजूद मेंटेनेंस और तकनीकी खराबियों के नाम पर सप्लाई ठप पड़ी है। लोगों का कहना है कि “फोटो खिंच गए, उद्घाटन हो गया, लेकिन पानी अब तक नहीं आया।”
जल संकट की गूंज अब सीएम हेल्पलाइन तक पहुंच चुकी है। 500 से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं। इनमें बड़ी संख्या उन मामलों की है जहां कागजों में योजना चालू है, लेकिन जमीन पर लोग अब भी प्यासे हैं।
विभागीय अधिकारी बिजली, तकनीकी खराबी और ठेकेदारों की देरी को वजह बता रहे हैं। उनका दावा है कि सुधार कार्य जारी है। लेकिन गांवों की तस्वीर सरकारी दावों से बिल्कुल उलट दिखाई देती है।
कटनी के ग्रामीण इलाकों में इस भीषण गर्मी में सबसे बड़ा सवाल यही है—जब टंकियां खड़ी हैं, पाइपलाइन बिछ चुकी है और योजनाएं “पूर्ण” बताई जा रही हैं, तो आखिर पानी कहां गायब है?







