किरनापुर थाना मामला: गर्भवती महिला से मारपीट के बाद गर्भपात, SIT जांच में चार पुलिसकर्मियों पर FIR

सूर्यास्त के बाद गिरफ्तारी, अवैध हिरासत और दबाव डालकर कबूलनामा कराने के आरोपों पर कार्रवाई; एसआईटी ने 49 से अधिक लोगों के बयान लिए
बालाघाट/किरनापुर। जिले के किरनापुर थाने में चोरी के मामले की जांच के दौरान महिला और उसके पति के साथ कथित दुर्व्यवहार एवं मारपीट का मामला अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन थाना स्टाफ के चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में महिला को पर्याप्त कानूनी आधार के बिना थाने में रोकने, सूर्यास्त के बाद गिरफ्तारी की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने, रोजनामचा में देरी तथा महिला और उसके पति पर दबाव डालकर संस्वीकृति कराने से जुड़ी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
मामले में आरोपी बनाए गए पुलिसकर्मियों में एसआई दामेन्द्र तुरकर, प्रधान आरक्षक आशीष बघेल, आरक्षक कपिल बघेल और महिला आरक्षक मेघा टेकाम शामिल हैं। ये चारों पुलिसकर्मी पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं।
मामले में अब पीड़ित पक्ष की ओर से एक और गंभीर दावा सामने आया है। दो माह की गर्भवती बताई जा रही सावित्री चौधरी की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों के अनुसार अत्यधिक रक्तस्राव के बाद मंगलवार रात उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
बुधवार को सोनोग्राफी कराए जाने पर भ्रूण में धड़कन नहीं मिलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद चिकित्सकों ने आगे की चिकित्सा प्रक्रिया की सलाह दी और महिला का जिला अस्पताल में उपचार जारी रहा।
महिला के बहनोई कैलाश पांचे का कहना है कि थाने की घटना के बाद सावित्री मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद परेशान थीं और इसी सदमे के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी।
हालांकि, गर्भपात का कारण सीधे तौर पर पुलिस कार्रवाई या मारपीट ही थी, यह चिकित्सकीय रूप से अभी स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हुआ है। इस संबंध में मेडिकल रिकॉर्ड, चिकित्सकीय राय और अन्य साक्ष्यों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने भी संबंधित चिकित्सक से जानकारी लेने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की बात कही है।
मरार माली महासभा की ओर से इस मामले को गंभीर बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई है। समाज की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि थाने में हुई कथित मारपीट या वहां दी गई किसी दवा के कारण गर्भावस्था प्रभावित हुई हो सकती है। इस दावे की भी जांच और चिकित्सकीय पुष्टि आवश्यक है।
चोरी से शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला किरनापुर पोस्ट ऑफिस में हुई चोरी की जांच से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 21 अगस्त 2026 को पोस्ट ऑफिस से 50 हजार रुपये चोरी होने की शिकायत सामने आई थी।
पुलिस जांच के दौरान टिमकीटोला निवासी कैलाश चौधरी और उनकी पत्नी सावित्री चौधरी को पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि पूछताछ के दौरान दोनों के साथ मारपीट की गई और कैलाश चौधरी पर चोरी कबूल करने के लिए दबाव बनाया गया।सावित्री चौधरी को बाद में मामले में आरोपी बनाकर न्यायालय में पेश किया गया था।
एसआईटी की जांच में क्या सामने आया?
शिकायत सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के निर्देश पर डीएसपी प्रतिष्ठा राठौर के नेतृत्व में चार सदस्यीय एसआईटी गठित की गई थी।
एसआईटी ने मामले की जांच के दौरान 49 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए, जिनकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई। जांच में चिकित्सकीय दस्तावेज, न्यायालयीन कार्रवाई, केस डायरी तथा तकनीकी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भी समीक्षा की गई। एसआईटी ने 22 सितंबर को अपनी विस्तृत रिपोर्ट पुलिस विभाग को सौंपी।
जांच रिपोर्ट में महिला को पर्याप्त विधिक आधार के बिना थाने में रोके जाने और रोजनामचा में प्रविष्टि में देरी जैसी प्रक्रियात्मक अनियमितताओं का उल्लेख है।
इसके अलावा महिला की गिरफ्तारी सूर्यास्त के बाद किए जाने और ऐसी स्थिति में आवश्यक न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति नहीं लिए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
एसआईटी की जांच में पुलिस कार्रवाई के आधार को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पर्याप्त परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाने के बजाय कथित इकबालिया साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई।
जांच में महिला और उसके पति को डराने-धमकाने तथा अनुचित दबाव डालकर संस्वीकृति कराने से जुड़े तथ्य भी पाए जाने की जानकारी सामने आई है।
यही बिंदु अब मामले की आगे की आपराधिक विवेचना में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चार पुलिसकर्मियों पर छह धाराओं में मामला
एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ BNS की धारा 127, 120, 115(2), 296(बी), 351(3) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले की आगे की विवेचना जारी है।
अब पुलिस को यह भी जांचना होगा कि थाने में महिला और उसके पति के साथ वास्तव में क्या हुआ, पूछताछ की प्रक्रिया क्या थी, गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित रिकॉर्ड क्या कहते हैं तथा उपलब्ध मेडिकल और तकनीकी साक्ष्य आरोपों से किस हद तक मेल खाते हैं।महिला और उसके पति को कथित रूप से थाने में प्रताड़ित किए जाने की शिकायत सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने तत्कालीन थाना प्रभारी एसआई दामेन्द्र तुरकर समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर पुलिस लाइन अटैच किया था। उस समय मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी।
अब एसआईटी की रिपोर्ट के बाद विभागीय कार्रवाई से आगे बढ़कर चारों पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।
15 सितंबर को हुआ था थाने का घेराव
पुलिस कार्रवाई के विरोध में मरार माली समाज की ओर से 15 सितंबर को किरनापुर में बड़ा आंदोलन किया गया था। प्रदर्शनकारी रैली के रूप में थाने पहुंचे और घेराव किया।
इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी तथा थाने पर पथराव और तोड़फोड़ के आरोप भी लगे। घटना के बाद पुलिस ने पूर्व सांसद कंकर मुंजारे समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मामले में 63 नामजद लोगों के साथ बड़ी संख्या में अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
इस कार्रवाई को लेकर प्रदर्शनकारी पक्ष की ओर से पुलिस पर निर्दोष लोगों को भी प्रकरण में शामिल करने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की भी स्वतंत्र जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
पुलिसकर्मियों पर लगी धाराओं को लेकर भी उठे सवाल
भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में लगाई गई धाराओं पर सवाल उठाते हुए कहा है कि महिला के साथ कथित अमानवीय व्यवहार और मारपीट के मामले में और गंभीर धाराएं लगाई जानी चाहिए थीं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन के बाद दर्ज किए गए प्रकरण में ऐसे लोगों को भी आरोपी बनाया जा रहा है, जो कथित तौर पर घटना में शामिल नहीं थे।
इन आरोपों पर पुलिस की ओर से आगे की विवेचना में साक्ष्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला की गिरफ्तारी की प्रक्रिया भी है। एसआईटी रिपोर्ट में सूर्यास्त के बाद गिरफ्तारी और उसके लिए आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार महिला को पर्याप्त कानूनी आधार के बिना थाने में रोके रखने और रोजनामचा प्रविष्टि में देरी के तथ्य भी सामने आए हैं।
यही कारण है कि अब मामला केवल कथित मारपीट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि हिरासत, गिरफ्तारी की वैधानिक प्रक्रिया, पूछताछ के तरीके और पुलिस रिकॉर्ड की जांच भी इसका हिस्सा बन गई है।
गर्भपात की वजह क्या थी?
सावित्री चौधरी के गर्भपात के बाद इस मामले में सबसे गंभीर सवाल यही है कि गर्भ में पल रहे भ्रूण की मौत की चिकित्सकीय वजह क्या रही।
परिजन इसे पुलिस कार्रवाई के बाद हुए सदमे और कथित मारपीट से जोड़ रहे हैं। वहीं, पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज मौजूदा एफआईआर में गर्भपात को लेकर अलग से कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए इस पहलू पर मेडिकल रिपोर्ट, विशेषज्ञ चिकित्सकीय राय और जांच के अन्य साक्ष्य निर्णायक होंगे।
यदि जांच में पुलिस कार्रवाई और गर्भपात के बीच प्रत्यक्ष कारणात्मक संबंध स्थापित होता है, तो मामले का कानूनी स्वरूप भी आगे बदल सकता है। फिलहाल इस संबंध में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
अब मामले की नियमित आपराधिक विवेचना में एसआईटी की रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, थाने के दस्तावेज, रोजनामचा, गिरफ्तारी से संबंधित रिकॉर्ड, न्यायालयीन दस्तावेज, उपलब्ध तकनीकी साक्ष्य और गवाहों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।
साथ ही, सावित्री चौधरी की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और गर्भपात के चिकित्सकीय कारण को लेकर अस्पताल की रिपोर्ट भी मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकती है।
किरनापुर का यह मामला अब पुलिस कार्रवाई और कथित मारपीट से आगे बढ़कर कानूनी प्रक्रिया, पुलिस हिरासत में अधिकारों, महिला की गिरफ्तारी की वैधता और मेडिकल साक्ष्यों से जुड़ा संवेदनशील मामला बन गया है। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद चार पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज होने से जांच का अगला चरण शुरू हो गया है। अब आगे की विवेचना से यह स्पष्ट होना है कि थाने में हुई घटनाओं की वास्तविक जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है और गर्भपात से जुड़े आरोपों का चिकित्सकीय एवं कानूनी आधार क्या निकलकर सामने आता है।







