अस्पताल में ‘हवा’ की सफाई: 22 मशीनों का भुगतान, काम पर सिर्फ 5; कंपनी की खुली पोल

रीवा ।डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला के विभाग और जिला में खुली आंखों से सुविधाओं में डाका डाला जा रहा है। डॉ सुनील अग्रवाल के हटते ही अब सारी पोल खुलनी शुरू हो गई है। हाइट्स और एजाइल कंपनी किस तरह से सरकार को धोखा दे रही है। अब सच सामने आने लगा है ।
जिस अस्पताल की साफ सफाई को लेकर डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला और सांसद तक उंगली उठा चुके हैं। उसकी असली वजह सामन आ गई है। दरअसल संजय गांधी अस्पताल, जीएमएच के लिए कंपनी ने 22 मशीनें स्वीकृत की थी लेकिन इनमें से 7 मशीनें अस्पताल पहुंची ही नहीं। सिर्फ 15 मशीनों से ही अभी तक तीन साल से काम चल रहा था।
अधिकारियों को इसकी भली भांति जानकारी थी लेकिन सब ने कमीशन के चक्कर में मामले को दबाए रखा। अब डीन के जाने के बाद सारी पोल खुलने लगी है। यही वजह है कि डीन कंपनी के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई तक नहीं कर रहे थे। डॉ सुनील अग्रवाल ने कंपनी के साथ सांठगांठ कर रखी थी। इस सांठगांठ ने मरीजों को गंदगी में रहने के लिए मजबूर कर दिया। जिस तरह से मप्र के स्वास्थ्य विभाग ने बिना अस्पताल के खुले ही इंदौर में डॉक्टरों की पदस्थापना कर दी थी। वैसा ही मामला डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला के शहरका भी है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन बिना मशीनें और साफ सफाई के ही एजाइल और हाइट्स को भुगतान कर रहा था। कंपनी के पास साफ सफाई की मशीनें तक नहीं थी। तीन साल इसी तरह निकाल दिया। अब पता चला कि 7 मशीनें आईं ही नहीं लेकिन कागज में स्वीकृत थी। इसके अलावा जो हैं, उनमें से 10 बंद पड़ी हैं। इन गायब और खराब मशीनों के बदले कंपनी को करोड़ों का भुगतान हो रहा था। सिर्फ मशीनों में ही कंपनी ने घोटाला नहीं किया है। कंपनी की मशीनें तो लापता हैं ही अब डे्रस भी नहीं मिल रहा है। कंपनी ने कर्मचारियों से ड्रेस के नाम पर रुपयों की कटौती की लेकिन किसी को कुछ नहीं दिया। डे्रस जूते तक नहीं मिले। अब नए डीन के आने के बाद उथल पुथल मची है। सभी को ड्रेस में रहने के लिए अनिवार्य किया गया है। कंपनी के पास न तो ड्रेस है और न ही जूते। ऐसे में आउटसोर्स कर्मचारी ड्रेस को लेकर भी परेशान हैं। यहां सिर्फ सरकारी अफसर ही नहीं प्राइवेट और आउटसोर्स कंपनियां भी घोटालेबाज निकल गई है। हाइट्स के मैनेजर अमृतांश शर्मा, एजाइल के मैनेजर विश्वास बाने और मनोज यादव ने सब डकार खाया। अब कुछ नहीं मिल रहा है।कितनी मशीनें हैं और कितनी चल रही, कितनी है खराब
संजय गांधी अस्पताल में हाई जेट प्रेशर मशीन 4 नग स्वीकृत हैं। इनमें से 1 नग ही मौजूद है। वह भी काम नहीं करती।
आटो स्क्रबर मशीन 4 स्वीकृत हैं। 4 मशीनें हैं भी लेकिन 1 ही काम करती है। शेष 3 मशीनें खराब हैं।
सिंगल डिस्क स्क्रबर मशीन 4 स्वीकृत हैं। 4 मशीनें हैं एक ही काम करती है। 3 खराब है।
वैक्यूम क्लीनर 4 स्वीकृत हैं। 4 मशीनें हैं लेकिन 2 खराब है। 2 मशीनें ही काम कर रही हैं।
मैन्युअल स्लीपर 4 नग स्वीकृत हं। इसमें से 2 ही मौके पर हैं। 1 चल रही। एक बंद है।
स्टीम वाटर जेट प्रेशर मशीन 2 नग स्वीकृत है लेकिन एक भी नहीं आई। स्टीम वाटर जेट प्रेशर मशीन सिर्फ कागजों में है।







