सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ विदिशा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत शमशाबाद के देवखजूरी में बन रही फोरलेन सड़क निर्माण में गंभीर अनियमितताओं का मामला अब गरमा गया है। स्थानीय जनता के कड़े विरोध और शिकायतों के बाद सागर सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने एनएचआई (NHI) के परियोजना निदेशक (विदिशा) को पत्र लिखकर निर्माण कार्य की सघन तकनीकी जांच करने और दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सांसद ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ तो यह मामला संसद तक गूंजेगा।
तकनीकी मापदंडों की अनदेखी, पुलिया नंबर 2300 बनी मुसीबत
क्षेत्र की जनता का आरोप है कि सड़क और पुलिया निर्माण में निर्धारित तकनीकी मापदंडों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। विशेषकर पुलिया संख्या 2300 के निर्माण में हुई तकनीकी चूक ने क्षेत्र में संकट खड़ा कर दिया है। जल निकासी के दोषपूर्ण डिजाइन और पुलिया की ऊंचाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सांसद ने अपने पत्र में इस पुलिया का वैज्ञानिक प्रमाणीकरण करने और डिजाइन में तत्काल सुधार करने की मांग की है।
20 गांवों में थमी फसल कटाई
यह पूरा क्षेत्र कृषि प्रधान है, जहाँ वर्तमान में फसल कटाई का सीजन चल रहा है। निर्माण में हुई त्रुटियों के कारण हार्वेस्टर जैसे भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है। नियोजन के समय किसानों को निर्बाध मार्ग का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब वाहनों के फंसने या रास्ता न होने के कारण करीब 15 से 20 गांवों की फसल कटाई रुक गई है। किसानों का कहना है कि निर्माण एजेंसी की मनमानी उनकी आजीविका पर सीधा प्रहार कर रही है।
ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी
सांसद वानखेड़े ने पत्र में न केवल तकनीकी खामियों बल्कि ठेकेदार और अधिकारियों के व्यवहार पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि निर्माण एजेंसी का अमला स्थानीय नागरिकों के साथ अशोभनीय व्यवहार कर रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि गुणवत्ता और व्यवहार में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित फर्म को भविष्य के अनुबंधों के लिए अपात्र घोषित करने और ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा मंत्रालय से की जाएगी।
सांसद की दो टूक- ‘जवाबदेही तय हो’
जनभावनाओं का सम्मान करते हुए सांसद ने परियोजना निदेशक को सख्त लहजे में लिखा है कि इस पूरे प्रकरण में जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक सुधार नहीं दिखता है, तो वे निर्माण एजेंसी के खिलाफ कठोर प्रशासनिक और कानूनी कार्यवाही हेतु मंत्रालय को रिपोर्ट भेजेंगी। इस पत्र के बाद अब एनएचआई और निर्माण एजेंसी के बीच हड़कंप मचा हुआ है।
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