मध्य प्रदेशराज्य

आध्यात्मिक और एतिहासिक विरासत है भगवान शिव का ॠण मुक्तेश्वर मंदिर : मठ में सावन में पहुंचते हैं हजारों की संख्या में शिवभक्त 

डिंडोरी lआध्यात्म की विरासत लिए हमारा भारत जहां धर्म और संस्कृति की एक पहचान को विश्व पटल पर संजो कर रखा है। जिसमें अनेक मंदिरों और विरासतों की पारंपरिक और आध्यात्मिक विरासत के साथ मान्यताएं और उनका धर्म के प्रति आमजन से धार्मिक जुड़ाव महसूस किया जा सकता है। सावन के महिने में भगवान शिव की पूजा अर्चना का विशेष संयोग रहता ही जहां अनेक स्थानों में शिव के मंदिर में कतार लगती है। अनेक शिवलिंग विश्व प्रसिद्ध है और कुछ क्षेत्रों में अद्वितीय पहचान बनाए हुए हैं जिन्हें जानने की आवश्यकता है। एक ऐसा ही मंदिर डिंडोरी जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में कुकरा मठ गांव में भगवान शिव का ॠण मुक्तेश्वर मंदिर स्थित है जो कि महादेव के मंदिर के रूप में जाने जाता है। इस मंदिर का निर्माण 800-1000 ईसवी के आसपास का माना जाता है जबकि बहुत से लोग इसे कल्चुरी काल के समकक्ष मानते हैं। विशाल चबूतरे पर बने इस मंदिर में विशाल शिवलिंग है जहां मंदिर के मुख्य द्वार पर नंदी महाराज विराजे हुए हैं। वर्तमान में मध्यप्रदेश पुरातत्व विभाग की निगरानी और रखरखाव में सुरक्षा के मानक तय कर रहा है जिसे 1958 में ही संरक्षित इमारत घोषित किया जा चुका है। मंदिर की सुरक्षा और संरक्षण के लिए भारतीय पुरातत्व विभाग ने लोहे की बाउंड्री सुरक्षा के लिहाज से तैयार कराई है।

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भगवान महादेव का ऐतिहासिक मंदिर

मान्यता है कि दर्शन मात्र से मिलती है ॠण से मुक्ति-  

भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर की मान्यता है कि यहां दर्शन करने से पितृ ऋण, देव ऋण और गुरु ऋण से मुक्ति मिलती है वहीं इस मंदिर की मान्यता यह भी है कि मंदिर का निर्माण पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान एक ही रात में किया था और शिखर का निर्माण कार्य पूर्ण होने से पहले सूर्य उदय हो जाने के चलते गुंबज नहीं बन पाया वहीं गुंबज में एक प्लेटफार्म आज भी बना है जो कि कलश स्थापना की प्रतिक्षा में रत है।

 

सावन में सोमवार को विशेष पर्व का होता है आयोजन – मान्यता अनुसार सैकड़ों साल से सावन के महिने में यहां दूर दूर से जन मानस भगवान शिव की पूजा करने आते हैं वहीं सावन मास में कांवड़िया भी लगातार मां नर्मदा का जल लेकर जलाभिषेक करते हैं। ऐतिहासिक विरासत संजोए हुए यह मंदिर डिंडोरी जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र बन गया है।

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