यश भारत, संपादकीय। इजराइल-हमास युद्ध : विनाश, आर्थिक संकट और अनिश्चित भविष्य
6 अक्टूबर 2025 तक संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, गाज़ा में 67,000 से अधिक लोग मारे जा चुके

यश भारत, संपादकीय। इजराइल-हमास युद्ध : विनाश, आर्थिक संकट और अनिश्चित भविष्य
7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजराइल पर किए गए भयानक हमले के दो साल पूरे हो गए हैं, एक ऐसी घटना जिसने मध्य पूर्व की आग को एक ऐसे दौर में भड़का दिया है, जिसके लपटें अब भी शांत नहीं हुई हैं। इस संघर्ष में अब तक दोनों पक्षों को अपार क्षति हुई है। इजराइल की ओर से 1,200 से अधिक लोगों की मौत और 240 से अधिक लोगों की बंधक बनाए जाने की घटनाएं हुई हैं। इसके जवाब में इजराइल द्वारा शुरू की गई सैन्य कार्रवाई में गाज़ा का अधिकांश इलाका तबाह हो चुका है।
6 अक्टूबर 2025 तक संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, गाज़ा में 67,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जबकि लाखों विस्थापित हैं। बुनियादी ढांचा पूरी तरह ध्वस्त है और स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई हैं। इजराइल और हमास के बीच यह संघर्ष न केवल मानवीय त्रासदी बन चुका है, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता भी प्रभावित हुई है।
हमास ने जब यह हमला किया तो उसका तर्क यह था कि इजराइल ने फिलिस्तीन के मामलों में न्याय नहीं दिया और स्वतंत्रता की पूर्ण मुक्ति उसका लक्ष्य है। 7 अक्टूबर के हमले के पीछे कई गहरे कारण थे, जिनमें सबसे प्रमुख था 2007 में गाज़ा पर हमास द्वारा कब्जा करने के बाद आर्थिक नाकेबंदी। इस नाकेबंदी ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को पंगु बना दिया और बेरोजगारी दर को 45 प्रतिशत तक पहुंचा दिया। इससे युवाओं में असंतोष बढ़ा और चरमपंथी संगठनों के लिए भर्ती आसान हो गई। वहीं, इजराइल हमास द्वारा नागरिकों के अपहरण और हत्या को एक बड़े आतंकवादी अपराध के रूप में देखता है।
इस युद्ध ने न केवल इजराइल और गाज़ा बल्कि पूरे मध्य पूर्व को अशांत बना दिया है। अमेरिका और यूरोपीय देशों की भूमिका भी इस युद्ध में स्पष्ट रूप से विभाजित रही है। एक ओर जहां अमेरिका इजराइल का समर्थन करता है, वहीं विश्व-स्तरीय संस्थाएं इस युद्ध से उत्पन्न मानवीय संकट की आलोचना कर रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र की विश्व-स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, 6 अक्टूबर 2025 तक 67,139 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। 119,600 से अधिक घायल हैं, और गाज़ा की 80 प्रतिशत आबादी विस्थापित हो चुकी है। भूगर्भीय और बीमारियों की स्थिति ने भी हालात बिगाड़े हैं। लगभग 1,200 स्वास्थ्य संस्थान नष्ट हो चुके हैं, जिससे चिकित्सा सेवाएं चरमरा गई हैं।
विश्व बैंक की रिपोर्ट बताती है कि गाज़ा की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। इस क्षेत्र में बेरोजगारी 60 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि उत्पादन दर में 80 प्रतिशत की गिरावट आई है। अनुमान है कि इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों और गाज़ा पर नियंत्रण की वजह से उसके अपने टैक्स सेक्टर और टेक्नोलॉजी उद्योग पर भी असर पड़ा है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, गाज़ा और वेस्ट बैंक की उत्पादन हानि और राज्य घाटे ने 19 बिलियन डॉलर का नुकसान किया है। वहीं इजराइल की आर्थिक वृद्धि दर 3 प्रतिशत से घटकर 1 प्रतिशत रह गई है। युद्ध की वजह से पुनर्निर्माण की लागत 52 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।
इजराइल के रक्षा बजट में मनुष्यता की कीमत चुकानी पड़ी है। युद्ध से पहले जिस देश की पहचान तकनीकी और पर्यटन केंद्र के रूप में थी, वह अब अपने अस्तित्व को लेकर संघर्ष कर रहा है।
स्पष्ट है कि यह संघर्ष केवल दो पक्षों के बीच नहीं है, बल्कि यह धार्मिक, राजनीतिक और आर्थिक तनावों की पराकाष्ठा बन चुका है। 67,000 से अधिक लोगों की जान लेने वाले इस युद्ध ने मध्य पूर्व की राजनीति को झकझोर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह आवश्यक है कि वह इस युद्ध को खत्म करने के लिए निर्णायक पहल करे।
राजनीतिक समाधान ही इस संघर्ष को समाप्त कर सकता है। इसके लिए दोनों पक्षों को समझौते की दिशा में आगे बढ़ना होगा, ताकि निर्दोष नागरिकों की जानें बचाई जा सकें।
जब तक शांति की वास्तविक इच्छा दोनों पक्षों में नहीं होगी, तब तक इस विनाशकारी युद्ध का अंत संभव नहीं है। आर्थिक संकट और अनिश्चित भविष्य की दिशा में बढ़ते ये कदम पूरी मानवता के लिए चेतावनी हैं। इसका असर आने वाले समय में पूरे क्षेत्र की स्थिरता और विश्व की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।







