यतीमखाने की जमीन पर घमासान, अब अस्पताल पर भी कब्जे का आरोप

यतीमखाने की जमीन पर घमासान, अब अस्पताल पर भी कब्जे का आरोप
– 2.7 एकड़ वक्फ संपत्ति का विवाद गहराया, 98 बच्चों की पानी व्यवस्था प्रभावित होने का दावा
भोपाल, यश भारत । शाहजहांनाबाद स्थित दारुल शफकत यतीमखाने की करीब 2.7 एकड़ जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड द्वारा संपत्ति को वर्ष 1961 से गजट में अधिसूचित वक्फ संपत्ति बताया जा रहा है। इसी आधार पर बोर्ड ने दारुल शफकत सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष शाहिद अलीम खान सहित अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई है। वहीं, अब दारुल शफकत सोसायटी ने जीवन रेखा अस्पताल प्रबंधन पर यतीमखाने के एक हिस्से पर कब्जा करने और वहां ताला लगाने का आरोप लगाया है।
सोसायटी के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन ने रात के समय यतीमखाने के एक हिस्से में ताला लगा दिया। इस हिस्से में पानी की मोटर और टैंक तक पहुंच बताई जा रही है। आरोप है कि ताला लगाए जाने के साथ ही गरीब महिलाओं के लिए संचालित सिलाई सेंटर का सामान भी बाहर निकाल दिया गया। सोसायटी ने इस घटनाक्रम से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सामने आने का दावा किया है।
पानी के लिए टैंकर पर निर्भरता
सोसायटी का कहना है कि ताला लगाए जाने के बाद यतीमखाने में रहने वाले करीब 98 बच्चों की पानी की व्यवस्था प्रभावित हुई है। पानी की मोटर और टैंक तक पहुंच नहीं होने के कारण अब टैंकर के जरिए पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। सोसायटी ने अस्पताल प्रबंधन की कार्रवाई को बच्चों और यतीमखाने में रहने वाले लोगों के लिए परेशानी बढ़ाने वाला बताया है।
वक्फ बोर्ड ने उठाए संपत्ति पर सवाल
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का आरोप है कि दारुल शफकत की जमीन वक्फ संपत्ति होने के बावजूद उसे निजी संपत्ति के तौर पर प्रस्तुत कर भवन निर्माण की अनुमति ली गई। बोर्ड के अनुसार जमीन के एक हिस्से को जीवन रेखा अस्पताल को किराए पर दिया गया और इससे करीब 2.26 करोड़ रुपये की आय हुई। बोर्ड का आरोप है कि इस आय का पूरा हिसाब उसे उपलब्ध नहीं कराया गया।
इन्हीं आरोपों के आधार पर बोर्ड ने सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष शाहिद अलीम खान समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। बोर्ड का कहना है कि संपत्ति की स्थिति और उससे जुड़े लेन-देन की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
एक ही संपत्ति, आमने-सामने दो दावे
दारुल शफकत जमीन विवाद में अब दोनों पक्षों के दावे सामने आ गए हैं। एक तरफ वक्फ बोर्ड संपत्ति को अपनी निगरानी वाली वक्फ संपत्ति बता रहा है, वहीं सोसायटी ने अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए यतीमखाने के हिस्से पर कब्जे का आरोप लगाया है। ताजा विवाद के बाद करीब 2.7 एकड़ जमीन का मामला केवल स्वामित्व और आय के सवाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यतीमखाने में रहने वाले बच्चों की मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी मामला गंभीर हो गया है।







