गर्मी का टार्चर झेल रहे ट्रैफिक जवानों को ओआरएस का सहारा

गर्मी का टार्चर झेल रहे ट्रैफिक जवानों को ओआरएस का सहारा
– धूप से बचने के लिए दिए जा रहे छाते, छांव में खड़ा होने की भी मिली अनुमति
भोपाल, यशभारत। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल इन दिनों तंदूर की तरह तप रही है। आम आदमी दोपहर के समय घरों और दफ्तरों के एसी-कूलर से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है, वहीं शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात पुलिस के जवान चौकन्ने होकर व्यवस्था संभाल रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस के जवानों की सेहत का ख्याल रखते हुए अब ओआरएस के पैकेट दिए जा रहे हैं इतना ही नहीं धूप से बचाने के लिए छाते भी बांटे गए हैं। यातायात पुलिस के जवानों को छांव में खड़ा होन की अनुमति भी मिल गई है।
मैदान पर तपस्वी की भूमिका में पुलिस
शहर के व्यस्ततम इलाकों जैसे बोर्ड ऑफिस चौराहा, पॉलिटेक्निक और रोशनपुरा पर दोपहर का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर रहा है। डामर की सडक़ें भट्टी की तरह गर्म हैं, जिससे निकलने वाली लहरें जवानों के चेहरे को झुलसा रही हैं। पिछले कुछ दिनों में लगातार धूप में खड़े रहने के कारण कई जवानों की तबीयत बिगडऩे की खबरें सामने आई हैं। फील्ड पर तैनात बल न केवल शारीरिक थकान, बल्कि डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के गंभीर खतरे से भी जूझ रहा है।
विडंबना यह है कि घंटों तक ड्यूटी करने वाले इन जवानों के पास कई जगहों पर सिर छिपाने के लिए न तो पर्याप्त छांव है और न ही गले को तर करने के लिए ठंडे पानी की सुलभ व्यवस्था। प्यास बुझाने के लिए उन्हें आसपास की दुकानों या राहगीरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
पुलिस कमिश्नर की संवेदनशीलता
जवानों की बिगड़ती हालत और मैदानी फीडबैक को देखते हुए भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार सिंह ने एक अत्यंत संवेदनशील और सराहनीय पहल की है। उन्होंने स्पष्ट कहा हैं कि भीषण गर्मी के दौरान किसी भी जवान की सेहत के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। पुलिस जवानों की सेहत का ख्याल रखने के लिए संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए गए हैं
अब क्रियान्वयन की बारी
पुलिस कमिश्नर के निर्देशों ने निश्चित रूप से महकमे में एक सकारात्मक संदेश भेजा है, लेकिन असली चुनौती इन घोषणाओं को धरातल पर उतारने की है। सवाल यह है कि क्या हर चौराहे पर पीने का साफ और ठंडा पानी समय पर पहुंचेगा? क्या पुलिस बूथों में कूलर या पंखों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी?
फील्ड पर तैनात जवानों का कहना है कि साहब के निर्देश राहत देने वाले हैं, लेकिन अगर चौराहों पर पोर्टेबल अंब्रेला या अस्थायी शेड की व्यवस्था हो जाए, तो काम करना और भी आसान होगा।
भोपाल की सडक़ों पर तैनात ये 460 जवान केवल ट्रैफिक नहीं संभाल रहे, बल्कि अपने फर्ज की गरिमा को भी बचाए हुए हैं। प्रशासन की ओर से मिलने वाली राहत की एक-एक बूंद इन फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स के लिए संजीवनी का काम करेगी। अब पूरी राजधानी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक वादों की ठंडक इन तपते हुए कंधों तक कब और कितनी जल्दी पहुंचती है। समाज को भी चाहिए कि इन विपरीत परिस्थितियों में नियमों का पालन कर पुलिस का सहयोग करें, ताकि उनका मानसिक तनाव कम हो सके।
सुविधा मुहैया कराई जा रही है
जवानों के लिए छाते और ठंडे पानी की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। जो भी संभव होगा, हम करेंगे।
– संजय कुमार सिंह, पुलिस आयुक्त, भोपाल
ओआरएस पैकेट दिए गए
शहर के 460 जवानों के लिए चौराहों पर छाते लगवाए जा रहे हैं। जहाँ सिग्नल सुचारू है, वहाँ जवानों को धूप में खड़े होने की जरूरत नहीं है। ओआरएस के पैकेट भी बांटे जा रहे हैं।
– बसंत कुमार कौल, एडिशनल डीसीपी, ट्रैफिक







