Jabalpur Beer News – साहबों की ‘सेटिंग’ वाले पी रहे चिल्ड बीयर, बाकी ठेकेदारों के हलक सूखे!

जबलपुर: गर्मी का पारा 40 पार जा रहा है और शहर में ठंडी को लेकर हाहाकार मचा है! लेकिन ये हाहाकार शौकीनों के बीच नहीं, बल्कि उन रसूखदार शराब ठेकेदारों के बीच है जिन्होंने करोड़ों की बोली लगाकर दुकानें तो खोल लीं, पर अब एक-एक पेटी बीयर के लिए आबकारी विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
‘चेहरा’ देखकर मिल रही बीयर, क्या आप साहब के ‘खास’ हैं?
शहर के शराब सिंडिकेट में इन दिनों एक ही चर्चा है—”बीयर चाहिए तो सेटिंग लाओ!” ठेकेदारों का सीधा आरोप है कि आबकारी विभाग के दफ्तरों में ‘समानता का अधिकार’ खत्म हो चुका है। यहाँ नियम और कायदे नहीं, बल्कि ठेकेदार का ‘चेहरा और पावर’ देखा जा रहा है। अगर आप साहब की गुड-बुक में हैं, तो गोदाम से ट्रक आपके यहाँ रवाना हो जाएगा, वरना ‘नो स्टॉक’ का बोर्ड तो तैयार खड़ा ही है।
करोड़ों का ‘धंधा’ और साहब का ‘गंदा’ खेल!
शुरू हुए 15 दिन हो गए, पर बीयर की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही। ठेकेदारों का दर्द सुनिए:
कर्ज में डूबे ठेकेदार: “साहब, 20% ज्यादा पैसा देकर दुकान ली है, लोन का ब्याज बढ़ रहा है, लेकिन विभाग हमें बीयर तक नहीं दे पा रहा।”
ऑनलाइन का ‘घोटाला’: कहने को तो सिस्टम ऑनलाइन है, लेकिन ठेकेदारों का कहना है कि साइट खुलते ही ‘खास चहेतों’ का कोटा चुपके से बुक कर दिया जाता है। बाकी लोग जब तक लॉग-इन करते हैं, तब तक सर्वर ‘ठंडा’ पड़ चुका होता है।
गर्मी में बीयर नहीं, ‘पसीना’ बेच रहे दुकानदार
जिले की 143 दुकानों का हाल बुरा है। सीजन का पीक चल रहा है, ग्राहक काउंटर पर आकर चिल्ड बीयर मांग रहा है और सेल्समैन उसे विभाग की नाकामी का किस्सा सुना रहा है। ठेकेदारों ने दो टूक कह दिया है—”ये भेदभाव बंद करो, वरना कलेक्टर साहब की अदालत में सरेआम पोल खोलेंगे!”
खबर के पीछे की ‘मिर्ची’
लोग कह रहे हैं कि ये किल्लत प्राकृतिक नहीं, बल्कि ‘मैन-मेड’ है। बीयर की पेटियों पर जो पहरा बिठाया गया है, उसके पीछे की असली वजह वो ‘मलाई’ है जो शायद सबको बराबर नहीं मिल रही। अब देखना ये है कि आबकारी विभाग कब अपनी आँखों से पक्षी प्रेम का चश्मा उतारता है और आम ठेकेदारों का धंधा पटरी पर लाता है।
एमआरपी से 50 रुपये तक महंगी बिक्री
शहर में बीयर की किल्लत क्या हुई, मानो शराब सिंडिकेट को अवैध कमाई की ‘लॉटरी’ लग गई हो। सूत्रों से मिली सनसनीखेज खबर के अनुसार, जिन चुनिंदा दुकानों पर बीयर उपलब्ध है, वहां सेल्समैन खुलेआम दादागिरी कर रहे हैं। ठंडी बीयर के नाम पर शौकीनों से एमआरपी से 30 से 50 रुपये अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि आबकारी विभाग की नाक के नीचे प्रिंट रेट से ज्यादा वसूली का यह ‘चटपटा’ खेल धड़ल्ले से चल रहा है। एक तरफ ठेकेदार स्टॉक न मिलने का रोना रो रहे हैं, तो दूसरी तरफ उपलब्ध स्टॉक को ‘ब्लैक’ में बेचकर ग्राहकों की जेब काटी जा रही है। नियम-कायदों को ताक पर रखकर चल रही इस लूट से न केवल आम जनता परेशान है, बल्कि विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। आखिर किसकी शह पर दुकानों में यह ‘ओवररेट’ का धंधा फल-फूल रहा है?







