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त्योहार पर भारी पड़े दूध के बढे हुए दाम, मिडिल क्लास पर सीधा असर

जबलपुर यश भारत। डेयरी संचालकों के द्वारा ऐन त्योहार के मौके पर दूध के दामों में की गई बढ़ोतरी से आम जनता अंदर ही अंदर कसमसा रही है। और इस बढ़ोतरी का असर रक्षाबंधन पर्व पर भी पड़ा। गरीब आदमी की कौन कहे मिडिल क्लास लोगों का बजट भी दूध के बढे हुए दामों के कारण गड़बड़ाने लगा है। आमतौर पर लोग त्योहारों के मौके पर घर पर खीर के अलावा दूध से बनने वाले दूसरे पकवान भी बनाते हैं लेकिन इस वर्ष लोगों ने इसका विचार ही त्याग दिया और इसके पीछे प्रमुख कारण था दूध माफिया की मनमानी। वैसे तो दूध के दामों मै की गई बढ़ोतरी को लेकर कुछ जन संगठनों के द्वारा विरोध के स्वर भी मुखर किए गए और अपनी आवाज प्रशासन तक भी पहुंचाई गई लोगों को उम्मीद थी कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि आगे आकर हस्तक्षेप करेंगे और उन्हें दूध के बढे हुए दामों से छुटकारा मिल सकेगा। लेकिन आम जनता के हाथ निराशा ही लगी। दूध के दामों का असर रक्षाबंधन पर बिकने वाली मिठाइयों पर भी देखा गया मिष्ठान विक्रेताओं ने दूध के दामों में की गई बढ़ोतरी की दुहाई देकर दूध से बनने वाली मिठाइयों के दाम भी बढ़ा दिए लेकिन लोगों की मजबूरी थी कि उन्हें महंगी मिठाई खरीदना पड़ी। जब आम मिडिल क्लास की यह स्थिति रही तो कमजोर वर्ग तो महंगा दूध खरीदने के बारे में सोच भी नहीं सकता। ऐसे में वह चाहकर भी त्यौहार में भी खीर बना ले यह नामुमकिन है। डेयरी संचालकों की हठधर्मिता और प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने आम जनता में आक्रोश भर दिया है।

दूधियों का भी होना चाहिए स्टिंग ऑपरेशन

कुछ समय पूर्व जब शराब के दामों में बढ़ोतरी हुई थी और काफी हो हल्ला मचा था तो जिला कलेक्टर के द्वारा पटवारी व दूसरे राजस्व अधिकारियों से एक गोपनीय स्टिंग ऑपरेशन कराया था और सारी हकीकत सामने आ गई थी। लोगों का कहना है कि जब शराब के दामों में बढ़ोतरी को लेकर कलेक्टर साहब स्टिंग ऑपरेशन करा सकते हैं तो आम आदमी की मेहती आवश्यकता दूध के संबंध में उनके द्वारा इस तरह की कोई कार्यवाही क्यों नहीं की जाती। यदि शराब के दामों की तरह दूध के दामों और मिलावट को लेकर भी स्टिंग ऑपरेशन कर लिया जाता है तो सारी हकीकत सामने आ जाएगी और इससे आम जनता को भी राहत मिलेगी।

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