
मिठी नदी की सफाई पर.लगा ब्रेक,छह महीनों में 10 में से 8 हिस्सों से नहीं निकाली गई गाद
मानसून से पहले बढ़ी मुंबई की चिंता
मुंबई, यश भारत,मुंबई को बाढ़ से बचाने में अहम भूमिका निभाने वाली मिठी नदी की डिसिल्टिंग (गाद निकालने) का काम पिछले छह महीनों से लगभग ठप पड़ा हुआ है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के आंकड़े बताते हैं कि अगस्त 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच नदी के 10 में से 8 हिस्सों में न तो एक भी वाहन लगाया गया और न ही कोई गाद निकाली गई। इस स्थिति ने आगामी मानसून को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा करीब 1,100 करोड़ रुपये के मिठी नदी डिसिल्टिंग घोटाले (2021–23) की जांच शुरू होने के बाद काम पर सीधा असर पड़ा है। फर्जी एमओयू, जाली बिल और गाद परिवहन से जुड़े इस घोटाले में कई ठेकेदारों के फरार होने से परियोजना की रफ्तार थम गई। परिणामस्वरूप नदी किनारे मशीनें और पोंटून लंबे समय से निष्क्रिय पड़े हैं।
■ बीकेसी में ठप पड़ा काम, मशीनें खड़ी रहीं
बीकेसी क्षेत्र के स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो से तीन महीनों से डिसिल्टिंग का काम आंशिक या पूरी तरह बंद है। नदी किनारे भारी मशीनरी दिखाई तो देती है, लेकिन वह सिर्फ खड़ी रहकर लापरवाही की तस्वीर पेश कर रही है। इससे जलनिकासी व्यवस्था कमजोर पड़ने का खतरा बढ़ गया है।
● आंकड़े बताते हैं भारी गिरावट
बीएमसी के रिकॉर्ड के अनुसार,
अप्रैल से जुलाई 2025 के दौरान मिठी नदी की सफाई के लिए 9,930 ट्रकों का उपयोग किया गया।
इसके मुकाबले अगस्त 2025 से जनवरी 2026 के बीच सिर्फ 523 ट्रक लगाए गए.
● बाढ़ नियंत्रण पर मंडराता खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि डिसिल्टिंग एक सालभर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मानसून के दौरान पानी के बहाव को सुचारु रखना है। यदि समय रहते गाद नहीं निकाली गई, तो भारी बारिश के दौरान जलभराव और बाढ़ की स्थिति फिर से गंभीर हो सकती है।
● जवाबदेही और समाधान की दरकार
घोटाले की जांच जरूरी है, लेकिन साथ ही रुके हुए काम को जल्द शुरू करना भी उतना ही अहम है। फिलहाल मिठी नदी की बदहाल स्थिति ने बीएमसी की मानसून-पूर्व तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और मुंबईकरों की चिंता बढ़ा दी है।
अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक जांच और काम के बीच संतुलन बनाकर मिठी नदी की सफाई को दोबारा गति देता है, ताकि आने वाले मानसून में शहर को किसी बड़े संकट का सामना न करना पड़े।







