डिस्पेंसरियों का समय 7.30 लेकिन जिम्मेदार पहुंचते हैं 9 बजे तक, सीजीएचएस वेलनेस सेंटर हाल बेहाल, लाभार्थी हो रहे परेशान

जबलपुर यश भारत। जबलपुर में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत सीजीएचएस के तहत जोनल मुख्यालय सहित 6 डिस्पेंसरी संचालित हैं। लेकिन अधिकांश डिस्पेंसरियों में डाक्टर्स सहित स्टाफ देर से आने के कारण सीजीएचएस से जुड़े केन्द्रीय सरकार के कर्मचारी और रिटायर्ड बुजुर्ग लाभार्थी परेशान हो रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इन परेशान लाभार्थियों की कोई सुनने वाला नहीं है।ले देकर इस संबंध में पेंशनर्स एसोसिएशनों के नुमाइंदे जब कभी आवाज उठाते हैं तो जोनल मुख्यालय से आश्वासन का मलहम लगा दिया जाता है।
मालूम हो कि डिस्पेंसरियों के खुलने का समय सुबह 7.30 से दोपहर 2 तक निर्धारित है। लेकिन एक दो डिस्पेंसरी को छोड़कर शेष में प्रभारी डाक्टर से लेकर स्टाफ 9 बजे तक आता है। लेकिन जाने का समय एक दम तय होता है। ठीक 2 बजे वहां ताला लटका नजर आता है। इतना ही नहीं मुख्यालय के नीचे स्थित डिस्पेंसरी में भी यही स्थिति है।गत दिवस पेंशनर्स एसोसिएशन के नुमाइंदों ने भी निरीक्षण में पाया कि लाभार्थियों की शिकायतें सही हैं। यद्यपि सभी जगह बायोमेट्रिक हाजिरी लगाने की व्यवस्था तो है लेकिन उसको संशोधित करने का अधिकार प्रभारी डाक्टर के पास है। जो संशोधित कर दिया जाता है।
यद्यपि जोनल मुख्यालय की ओर से बार बार सभी डिस्पेंसरी प्रभारी को आगाह किया जाता लेकिन उसका कोई असर इसलिए नहीं होता है कि जोनल डायरेक्टर प्रभारी डिस्पेंसरी डाक्टर के समकक्ष होता है। जो सिर्फ सलाह दे सकता लेकिन कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है।करोना काल में एक लाभार्थी ने जरूर इसकी शिकायत तत्कालीन कलेक्टर भरत सिंह से की थी। उन्होंने शिकायत पर संज्ञान भी लिया था और शिकायत कर्ता को राहत भी मिली थी लेकिन उनका भी कहना था कि सीजीएचएस उनके कार्य क्षेत्र में नहीं आता है। लाभार्थियों का कहना है कि भले ही कलेक्टर राज्य सरकार में प्रभार देखते हैं। लेकिन वे केंद्र सरकार के प्रतिनिधि हैं। अतः यदि कलेक्टर हस्तक्षेप करें तो सीजीएचएस की अव्यवस्थाओं पर अंकुश लग सकता है।







