होम्योपैथी डॉक्टर अब नहीं कर पाएंगे हेयर ट्रांसप्लांट: स्वास्थ्य विभाग का सख्त रुख

जबलपुर, यशभारत। जबलपुर में होम्योपैथी की डिग्री रखने वाले डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे हेयर ट्रांसप्लांट पर अब पूर्ण विराम लगने वाला है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे क्लीनिकों और डॉक्टरों के खिलाफ एक बड़े और कड़े अभियान की तैयारी कर ली है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजय मिश्रा ने इस मामले में अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए कहा है कि, “शिकायतों के आधार पर हमारी टीमें पहले से ही ऐसे क्लीनिकों की जांच कर रही हैं और जल्द ही एक व्यापक अभियान चलाकर सभी अनधिकृत प्रैक्टिस करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी और उनके क्लीनिक बंद कराए जाएंगे।”
मरीजों के लिए चेतावनी: फर्जीवाड़ा रोकने की पहल
अगर आप जबलपुर या आसपास कहीं भी हेयर ट्रांसप्लांट कराने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ी चेतावनी है। विभाग की जांच में सामने आया है कि शहर में कई ऐसे क्लीनिक धड़ल्ले से चल रहे हैं, जहां न तो कोई योग्य स्किन स्पेशलिस्ट मौजूद है और न ही कोई प्रमाणित प्लास्टिक सर्जन। इसके बावजूद वे खुलेआम हेयर ट्रांसप्लांट जैसी संवेदनशील सर्जिकल प्रक्रियाएं कर रहे हैं।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि शहर में कुछ डेंटिस्ट, होम्योपैथ, आयुर्वेदाचार्य, और यहां तक कि सामान्य टेक्नीशियन व कॉस्मेटोलॉजिस्ट भी बाल उगाने या हेयर ट्रांसप्लांट करने का दावा कर रहे हैं। जबकि, नियमों के अनुसार हेयर ट्रांसप्लांट सर्जरी करने की पात्रता केवल मैक्सिलोफेशियल सर्जन (Maxillofacial Surgeon) को ही है। यह एक जटिल सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें विशेष ज्ञान और अनुभव की आवश्यकता होती है, ताकि संक्रमण और अन्य गंभीर जटिलताओं से बचा जा सके।
पूर्व में भी हुई है कार्रवाई, अब होगा और सख्त अभियान
यह कोई पहली बार नहीं है जब स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे फर्जी क्लीनिकों पर शिकंजा कसा है। दो महीने पहले भी प्रशासन ने कुछ ऐसे अनाधिकृत क्लीनिकों को बंद करवाया था, जो बिना किसी योग्य डॉक्टर, वैध पंजीकरण या आवश्यक विशेषज्ञता के ही हेयर और स्किन ट्रीटमेंट कर रहे थे।
वर्तमान अभियान इस बात का संकेत है कि विभाग अब इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। डॉ. मिश्रा ने आगे कहा कि “यह अभियान मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और चिकित्सा क्षेत्र में फैले इस तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक है। हम किसी भी ऐसे व्यक्ति या संस्थान को अनुमति नहीं देंगे जो बिना उचित योग्यता और लाइसेंस के लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हों।”
इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें संदिग्ध क्लीनिकों पर औचक निरीक्षण करेंगी और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें क्लीनिकों को सील करना और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना शामिल हो सकता है। यह कदम न केवल मरीजों को धोखेबाजों से बचाएगा बल्कि चिकित्सा मानकों और नैतिकता को भी बनाए रखने में मदद करेगा।







