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फर्जी फर्म बनाकर मेस भुगतान में 1.55 करोड़ की हेराफेरी, EOW ने 7 लोगों पर दर्ज की FIR

फर्जी फर्म बनाकर मेस भुगतान में 1.55 करोड़ की हेराफेरी, EOW ने 7 लोगों पर दर्ज की FIR

जबलपुर, यश भारत। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने राजधानी स्थित शासकीय श्रमोदय आवासीय विद्यालयों में मेस भुगतान के नाम पर हुई करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा करते हुए 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच में करीब 1 करोड़ 55 लाख 49 हजार 498 रुपये की गड़बड़ी सामने आई है। मामले में तीन पूर्व प्राचार्य, तत्कालीन लेखापाल, एक कर्मचारी और फर्जी फर्म से जुड़े लोगों को आरोपी बनाया गया है।

EOW की जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 में मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के श्रमोदय विद्यालयों में मेस संचालन के लिए टेंडर जारी किया गया था। भोपाल और इंदौर विद्यालय का ठेका “कनक फूड मैनेजमेंट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड” कंपनी को दिया गया था। कंपनी विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराती थी और भुगतान बैंक ऑफ बड़ौदा, गोवा शाखा स्थित खाते में किया जाता था।

जांच में पाया गया कि वर्ष 2023 में कंपनी में सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत गौरव शर्मा ने धोखाधड़ी की साजिश रची। उसने असली कंपनी के नाम से “प्राइवेट लिमिटेड” शब्द हटाकर “कनक फूड मैनेजमेंट सर्विसेस” नाम से फर्जी फर्म तैयार कर ली और उसका बैंक खाता एस.एम.सी फाइनेंस बैंक, इंदौर में खुलवा लिया।

बताया गया कि 27 जून 2024 को गौरव शर्मा ने फर्जी लेटरहेड तैयार कर अपने कर्मचारी कुलदीप शुक्ला के माध्यम से विद्यालय की अकाउंटेंट लीना विश्वकर्मा को पत्र सौंपा। इसमें कंपनी का बैंक खाता बदलने की जानकारी दी गई और भविष्य के सभी भुगतान नए खाते में करने के निर्देश दिए गए।

जांच एजेंसी के अनुसार अकाउंटेंट लीना विश्वकर्मा ने बैंक खाता बदलने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति नहीं ली। भुगतान पास कराने के लिए फाइलों और नोटशीट में असली कंपनी का नाम लिखा जाता था, लेकिन चेक काटते समय जानबूझकर “प्राइवेट लिमिटेड” शब्द हटाकर राशि फर्जी फर्म के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती थी।

इस पूरे मामले में विद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य विजय सिंह महोबिया, संतोष सिंह सिसोदिया और वीरेंद्र दुबे की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। जांच में सामने आया कि इन अधिकारियों ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर फर्जी भुगतान को मंजूरी दी। वहीं अकाउंटेंट लीना विश्वकर्मा की भी गौरव शर्मा के साथ मिलीभगत पाई गई।

EOW की जांच में यह भी सामने आया कि बैंक खाता बदलने का आधिकारिक पत्र 27 जून 2024 को विद्यालय को दिया गया था, जबकि फर्जी खाते में पहला भुगतान अक्टूबर 2023 में ही कर दिया गया था। इससे पूरे मामले में सुनियोजित साजिश की पुष्टि हुई है।

फरवरी 2025 में विद्यालय में नए प्राचार्य प्रदीप राजावत की पदस्थापना के बाद इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ। उन्होंने चेक पर “प्रा. लि.” शब्द जोड़कर वास्तविक कंपनी का नाम देखा और करीब 21.95 लाख रुपये का भुगतान रोक दिया। इसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई।

EOW के अनुसार जांच के दौरान शिकायतकर्ता, प्राचार्यों, अकाउंटेंट और बैंक अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए। स्कूल के बिल, चेक बुक, कैशबुक और बैंक रिकॉर्ड का मिलान करने पर स्पष्ट हुआ कि असली कंपनी लगातार भुगतान के लिए विद्यालय से संपर्क कर रही थी, जबकि सरकारी राशि फर्जी खाते में भेजी जा रही थी।

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि विद्यार्थियों को भोजन वास्तविक कंपनी द्वारा ही उपलब्ध कराया जा रहा था, लेकिन भुगतान फर्जी फर्म के खाते में ट्रांसफर किया जा रहा था। केवल कंपनी के नाम से “प्राइवेट लिमिटेड” हटाकर मिलते-जुलते नाम की फर्जी फर्म बनाकर यह पूरा फर्जीवाड़ा किया गया।

EOW ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 61(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत FIR दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

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