जबलपुर ,यश भारत । देश की सैन्य ताकतों और सामरिक सुरक्षा को और अधिक चाक-चौबंद करने के उद्देश्य से रक्षा मंत्रालय ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने सेना की मारक क्षमता और तकनीकी कौशल को बढ़ाने के लिए 2 लाख 38 हजार करोड़ रुपये के मेगा प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है। आज नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेनाओं (थल, नभ और जल) के विभिन्न प्रस्तावों के लिए ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (AoN) प्रदान की।
ऐतिहासिक रहा वित्तीय वर्ष, स्वीकृतियां सबसे उच्च स्तर पर
मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीएसी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कुल छह लाख 73 हजार करोड़ रुपये मूल्य के 55 बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इस वर्ष दी गई ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (AoN) और हस्ताक्षरित पूंजीगत अनुबंधों का यह आंकड़ा अब तक के किसी भी वित्तीय वर्ष में सबसे अधिक है, जो देश की रक्षा तैयारियों में आई अभूतपूर्व तेजी को दर्शाता है।
भारतीय सेना को मिलेंगे घातक हथियार, बढ़ेगा संचार नेटवर्क
भारतीय थल सेना के आधुनिकीकरण के लिए रक्षा परिषद ने कई महत्वपूर्ण प्रणालियों को मंजूरी दी है:
अभेद्य होगी सुरक्षा: सेना को जल्द ही ‘डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम’ और ‘आर्मर्ड पियर्सिंग टैंक एमुनिशन’ (कवच-भेदी गोला-बारूद) सौंपे जाएंगे।
दुश्मन पर रियल-टाइम नज़र: ‘एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम’ के जरिए सेना को वास्तविक समय में हवाई रक्षा नियंत्रण और सटीक रिपोर्टिंग की क्षमता मिलेगी।
अचूक संचार प्रणाली: ‘हाई कैपेसिटी रेडियो रिले’ के जरिए युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी विश्वसनीय और फेल-प्रूफ कम्युनिकेशन नेटवर्क स्थापित होगा।
दुश्मन के कैंपों को तबाह करेगी ‘धनुष’: इसके साथ ही ‘धनुष गन सिस्टम’ तोपखाने की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा, जिससे दुर्गम इलाकों और लंबी दूरी पर बैठे दुश्मन को भी बेहद सटीकता से निशाना बनाया जा सकेगा। इसके अलावा बिना रनवे के संचालित होने वाले ‘एरियल सर्विलांस सिस्टम’ से निगरानी मजबूत होगी
वायुसेना के बेड़े में शामिल होंगे S-400 और घातक स्ट्राइक ड्रोन
आसमान में भारत की संप्रभुता को अचूक बनाने के लिए वायुसेना के कई बड़े प्रस्तावों को स्वीकार किया गया है:
S-400 मिसाइल प्रणाली: देश के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों को निशाना बनाने वाले दुश्मन के लंबी दूरी के हवाई खतरों (एयर वेक्टर्स) को नष्ट करने के लिए S-400 लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी गई है।
रिमोटली पायलेटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट: यह आधुनिक ड्रोन सिस्टम भारतीय वायुसेना को बिना किसी मानवीय जोखिम के आक्रामक जवाबी कार्रवाई और समन्वित हवाई अभियानों को अंजाम देने की ताकत देगा। साथ ही यह गुप्त रूप से खुफिया जानकारी और निगरानी (ISR) जुटाने में सक्षम होगा।
सुखोई (Su-30) को नया जीवन: मंत्रालय के अनुसार, सुखोई-30 एयरो इंजन और उसके कंपोनेंट्स के ओवरहॉल (जीर्णोद्धार) की मंजूरी मिलने से इन लड़ाकू विमानों का सेवा काल (सर्विस लाइफ) बढ़ जाएगा, जिससे वायुसेना की ऑपरेशनल जरूरतें पूरी होंगी। इसके अतिरिक्त, ‘मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट’ की खरीद को भी हरी झंडी मिली है।
तटीय सुरक्षा भी होगी मजबूत
देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा को चाक-चौबंद करने की कड़ी में भारतीय तट रक्षक बल (Indian Coast Guard) के लिए ‘हैवी ड्यूटी एयर कुशन व्हीकल्स’ (होवरक्राफ्ट) की खरीद को भी मंजूरी दी गई है, जिससे तटीय इलाकों में गश्त और रेस्क्यू ऑपरेशन्स को नई गति मिलेगी।







