आयुर्वेद अस्पताल में मरीज प्यासे, पहली मंजिल पर एक हफ्ते से ठप पेयजल व्यवस्था
गंभीर मरीज नीचे से भरकर ला रहे पानी, करोड़ों के अस्पताल में RO खराब; अव्यवस्थाओं ने खोली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल

जबलपुर, यशभारत। एक ओर सरकार आयुष चिकित्सा को बढ़ावा देने और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे कर रही है, वहीं गौरीघाट स्थित शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में मरीजों को इलाज से पहले बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। अस्पताल की पहली मंजिल पर पिछले एक सप्ताह से पेयजल व्यवस्था पूरी तरह ठप है। हालत यह है कि भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को पीने का पानी लेने के लिए बार-बार नीचे आना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हो रही है, जो गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हैं।

गर्मी में पानी के लिए भटक रहे मरीज
भीषण गर्मी के बीच अस्पताल में भर्ती मरीजों को शुद्ध पेयजल तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। अस्पताल में लगे आरओ (RO) सिस्टम खराब पड़े हैं, लेकिन कई दिनों बाद भी उन्हें दुरुस्त नहीं कराया गया। पहली मंजिल पर भर्ती मरीजों को पानी के लिए नीचे आना पड़ रहा है या फिर परिजनों के भरोसे रहना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही से मरीजों और उनके परिजनों में भारी नाराजगी है।
हर दिन सैकड़ों मरीज, लेकिन मूलभूत सुविधा भी नहीं
यह चिकित्सालय संभाग का प्रमुख आयुर्वेदिक अस्पताल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। यहां गठिया, आमवात, साइटिका, कमर दर्द, सर्वाइकल, गैस, कब्ज, एसिडिटी, बवासीर, भगंदर, पीसीओडी, त्वचा रोग, माइग्रेन, तनाव, अनिद्रा, दमा, मधुमेह, मोटापा और पक्षाघात जैसी गंभीर बीमारियों का उपचार कराया जाता है। कई मरीज भर्ती भी रहते हैं, लेकिन उन्हें पीने का स्वच्छ पानी तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा।
बुनियादी सुविधाओं पर सवाल
अस्पताल में इलाज की व्यवस्था तो है, लेकिन मरीजों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में प्रशासन पूरी तरह विफल नजर आ रहा है। स्वास्थ्य संस्थान में पेयजल जैसी आवश्यक सुविधा का एक सप्ताह तक ठप रहना जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। मरीजों का कहना है कि जब अस्पताल में पानी जैसी जरूरी व्यवस्था नहीं है तो बेहतर इलाज के दावे कैसे पूरे होंगे।
प्राचार्य बोले— जल्द होगी व्यवस्था
इस संबंध में आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस.एल. अहिरवार ने कहा कि फिलहाल वह दो दिन की अवकाश पर हैं मामला उनके संज्ञान में आया है। लौटते ही पेयजल व्यवस्था दुरुस्त कराने के निर्देश दिए जाएंगे और मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
सवाल यह है…
प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावे कर रही है, लेकिन जब अस्पतालों में भर्ती मरीजों को पीने का पानी भी नसीब न हो, तो व्यवस्थाओं की हकीकत खुद सामने आ जाती है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं या फिर मरीजों को यूं ही पानी के लिए भटकना पड़ता रहेगा।








