पहलगाम आतंकी हमला: NIA चार्जशीट में चौंकाने वाले खुलासे, लोकल मदद से हुई 26 लोगों की हत्या
टूरिस्ट गाइड चाहते तो टल सकता था हमला

नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। NIA सूत्रों के मुताबिक स्थानीय टूरिस्ट गाइड परवेज और बशीर अहमद समय रहते पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दे देते तो 26 लोगों की जान बच सकती थी। जांच में सामने आया कि हमले से एक दिन पहले तीनों आतंकी परवेज की झोपड़ी में रुके थे, जहां उन्हें खाना, पानी और अन्य सामान उपलब्ध कराया गया।
आतंकियों को खाना-पानी और पनाह
सूत्रों के अनुसार आतंकी फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी ने परवेज की झोपड़ी में कई घंटे बिताए। इस दौरान उन्हें चाय, खाना और जरूरी सामान दिया गया। जाते समय आतंकियों को खाना पैक कर भी दिया गया। बदले में आतंकियों ने दोनों गाइडों को 3000 रुपये दिए थे।
सुरक्षा बलों की जानकारी जुटा रहे थे आतंकी
NIA जांच में सामने आया कि आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा, सुरक्षा बलों की तैनाती और मूवमेंट से जुड़ी जानकारी भी जुटाई थी। बशीर अहमद ने कबूल किया कि आतंकियों ने सुरक्षित ठिकाने तक पहुंचाने में मदद मांगी थी। जांच एजेंसी मान रही है कि लोकल सपोर्ट के बिना हमला संभव नहीं था।
हमले से कुछ घंटे पहले फिर दिखे आतंकी
सूत्रों के मुताबिक 22 अप्रैल को हमले से कुछ घंटे पहले भी दोनों गाइडों ने आतंकियों को बैसरन पार्क के बाहर देखा था। इसके बावजूद उन्होंने किसी एजेंसी को सूचना नहीं दी। हमला होने के बाद दोनों अंडरग्राउंड हो गए थे।
पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे थे टेलीग्राम चैनल
जांच में यह भी सामने आया कि हमले की जिम्मेदारी लेने वाला “Kashmir Fight” टेलीग्राम चैनल पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा से संचालित हो रहा था। बाद में TRF ने चैनल हैक होने का दावा कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की। NIA के अनुसार यह पाकिस्तान की “फॉल्स फ्लैग” साजिश का हिस्सा था।
पाकिस्तान में खरीदे गए मोबाइल का इस्तेमाल
मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के पास से बरामद मोबाइल फोन पाकिस्तान के लाहौर और कराची से खरीदे गए थे। इससे जांच एजेंसियों को पाकिस्तान कनेक्शन के पुख्ता सबूत मिले हैं।
‘लंगड़ा’ निकला हमले का मास्टरमाइंड
NIA ने अपनी चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी सैफुल्लाह साजिद जट्ट उर्फ “लंगड़ा” को मुख्य आरोपी बनाया है। जांच के मुताबिक वही पाकिस्तान के लाहौर में बैठकर आतंकियों को रियल टाइम निर्देश दे रहा था। पैर में गोली लगने के बाद उसकी एक टांग कट चुकी है, इसलिए उसे “लंगड़ा” कहा जाता है।
कश्मीर में खड़ा किया था बड़ा नेटवर्क
सैफुल्लाह साजिद 2005 में जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कर कुलगाम में रहा था और वहीं उसने स्थानीय नेटवर्क तैयार किया। बाद में उसने TRF जैसे प्रॉक्सी आतंकी संगठन खड़े करने में भी अहम भूमिका निभाई। NIA ने उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है।







