अक्षय आंवला नवमी पर महिलाओं ने की पूजा और लगाई परिक्रमा आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश
On Akshaya Amla Navami, women performed puja and circumambulated the earth, spreading the message of nature conservation with faith.

अक्षय आंवला नवमी पर महिलाओं ने की पूजा और लगाई परिक्रमा आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश
जबलपुर यशभारत।धार्मिक आस्था और प्रकृति संरक्षण का अद्भुत संगम देखने को मिला अक्षय आंवला नवमी के पावन अवसर पर शहर भर में महिलाओं ने परंपरानुसार आंवला वृक्ष के नीचे पूजन-अर्चन कर परिक्रमा लगाई, प्रसाद ग्रहण किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

सुबह से ही जहां-जहां आंवला के पेड़ थे, वहां पूजा के लिए महिलाओं की भीड़ जुटी रही। किसी ने थाली में नारियल, फूल और दीपक सजाए, तो किसी ने वृक्ष की परिक्रमा कर अक्षय फल की प्राप्ति का संकल्प लिया। आंवला वृक्ष के नीचे बैठकर प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा भी निभाई गई, जो दिनभर और शाम तक जारी रही। शाम को महिलाएं दीपक जलाकर वृक्ष के चारों ओर घी के दीये भी रखती हैं।
प्रकृति पूजा से जुड़ा पर्व
आंवला नवमी केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव भी है। पुराणों के अनुसार, आंवला वृक्ष को भगवान विष्णु का प्रिय माना गया है और इसे जीवनदायी औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है।
आंवला वृक्ष न केवल स्वास्थ्यवर्धक फल देता है बल्कि वातावरण को भी शुद्ध करता है। इस दिन उसकी पूजा कर लोग पर्यावरण संरक्षण और हरियाली के महत्व को स्मरण करते हैं।
धार्मिक आस्था और पर्यावरण चेतना का संगम
धार्मिक मान्यता है कि आंवला नवमी के दिन आंवला वृक्ष की पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं, वैज्ञानिक दृष्टि से यह दिन प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने का प्रतीक बन गया है। महिलाएं वृक्ष की परिक्रमा करते हुए न केवल परिवार की मंगलकामना करती हैं, बल्कि वृक्ष संरक्षण का संदेश भी देती हैं।
पूरे शहर में यह पर्व श्रद्धा, आस्था और पर्यावरण प्रेम का अनोखा प्रतीक बनकर मनाया गया।






