आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, उम्रकैद पर रोक से इनकार; राजस्थान सरकार से मांगा जवाब
नई दिल्ली,यश भारत

नई दिल्ली,यश भारत ,खुद को भगवान बताने वाले आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। मंगलवार को सर्वोच्च अदालत ने 2013 में नाबालिग से दुष्कर्म मामले में राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर राजस्थान सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। हालांकि, कोर्ट ने उनकी उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने या उसे निलंबित करने से साफ इनकार कर दिया।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि फिलहाल जमानत नहीं दी जा रही है। राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद ही इस पर विचार किया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल तब ही जमानत पर विचार किया जा सकता है, जब आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति इतनी गंभीर हो कि उनके जीवन को खतरा हो।सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि आसाराम को आवश्यक और उचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने दलील दी कि उनके मुवक्किल की उम्र 80 वर्ष से अधिक है और वे कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं।
क्या है मामला?
राजस्थान हाई कोर्ट ने 27 मई को ट्रायल कोर्ट के फैसले को आंशिक रूप से बरकरार रखते हुए आसाराम को गैंगरेप, आपराधिक साजिश और POCSO की कुछ धाराओं से बरी कर दिया था। हालांकि, नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में IPC की धारा 376(2)(F) के तहत उनकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।
इसके अलावा हाई कोर्ट ने गलत तरीके से बंधक बनाने, मानव तस्करी, आपराधिक धमकी, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने, यौन उत्पीड़न तथा POCSO और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की अन्य संबंधित धाराओं के तहत दोषसिद्धि भी कायम रखी थी।गौरतलब है कि 25 अप्रैल 2018 को ट्रायल कोर्ट ने जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में आसाराम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।







