जबलपुरदेशमध्य प्रदेशराज्य

गुलौआ तालाब में अब न म्यूजिक बज रहा न चल रहा फुहारा

7 करोड़ की लागत से बना उद्यान अब सिर्फ नगर निगम की कमाई का साधन

जबलपुर यश भारत। एक दशक पूर्व उपनगरीय क्षेत्र गढ़ा का गुलौआ तालाब जो 7 करोड़ रुपए से संवारा गया अब उपेक्षा का शिकार हो कर नगर निगम की कमाई का साधन बन गया है। तालाब में शुरू हुआ म्यूजिक फाउंटेन अब अपना अस्तित्व  खोता प्रतीत हो रहा है ‌। किसी शायर द्वारा कही गई शायरी की एक लाइन याद आ रही है कि खंडहर बता रहे हैं कि इमारत बुलंद थी। शुरुआती दौर में चलने वाला म्यूजिक फाउंटेन न केवल गढ़ा वासियों को ,अपितु शहर के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा। शहर के विभिन्न हिस्सों से लोग म्यूजिक फाउंटेन का आनंद लेने आते थे। लेकिन अब क्षेत्रीय लोगों का ही आना कम हो गया है। सिवाय सुबह शाम आने वाले वरिष्ठ जनों के।
तत्कालीन महापौर डा.श्रीमती स्वाति गोडबोले और तत्कालीन महापौर वेद प्रकाश की सोच ने बदहाल गुलौआ तालाब को एक खूबसूरत जगह में तब्दील कर दिया। लेकिन धीरे-धीरे अब गुलौआ उद्यान अपनी खूबसूरती खोता जा रहा है ‌। शुरू में रंगीन फुहारों के साथ बजने वाला म्यूजिक लोगों को एक अलग ही आनंद की अनुभूति कराता था। यहां बजने वाला म्यूजिक न केवल उद्यान में आये लोगों का मनोरंजन करता था बल्कि एक से डेढ़ किलोमीटर के दायरे में स्पष्ट सुना जाकर लोगों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करता रहा। लेकिन धीरे धीरे उसका रखरखाव कम होता गया।इसी के साथ प्रतिदिन बजने वाले नये गानों की जगह वही गाने दोहराये जाने लगे और धीरे धीरे वो भी बंद हो गये। यही हाल फुहारों का हो गया वो भी विभिन्न कारणों से धीरे-धीरे बंद होते चले गए। अब सिर्फ फुहारों का ढांचा बचा है जो पुराने आ रहे लोगों को याद दिलाता है कि कभी हम भी आकर्षण का केंद्र रहे।
बताया जाता है कि जिस ठेकेदार को म्यूजिक फाउंटेन के संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी उसका वर्षों से भुगतान नहीं किया गया है। लिहाज़ा उसने भी अपने कर्मचारियों को वहां से अलग कर लिया है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि नगर निगम को सिर्फ अपनी बसूली से मतलब है। रखरखाव पूरी तरह बंद हो गया है।आये दिन तालाब की मछलियां मर रहीं हैं। लोगों को आकर्षित करने वाली बतखें भी रखरखाव के आभाव में अपना कुनबा नहीं बढ़ा पा रही हैं ‌।बड़ी मशक्कत के बाद गढ़ा क्षेत्र को मिली सौगात धीरे धीरे अपना आकर्षण खोती जा रही है। जिसके चलते लोग नहीं आयेंगे तो आय भी घटती चली जाएगी और एक दिन ऐसा आएगा जब नगर निगम का उद्यान विभाग अपने कर्मचारियों को हटा कर गुलौआ तालाब उद्यान को लावारिस हालत में छोड़ देगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button