यश भारत की खबर का बड़ा असर: जिला पंचायत में गूंजा स्व सहायता समूह घोटाले का मामला
दो जिला पंचायत सदस्यों ने विकासखंड प्रबंधकों की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

भ्रष्टाचार के मामले दबाने का आरोप, उच्च स्तरीय कमेटी से जांच की मांग
जबलपुर, यश भारत। यश भारत द्वारा अपने पिछले अंकों में एनआरएलएम के अधिकारियों द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार और स्व सहायता समूह की महिलाओं के साथ हो रहे गोलमाल को लेकर समाचार प्रकाशित किए थे। इसके बाद दो जिला पंचायत सदस्यों ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए जिला पंचायत की आम सभा की बैठक में इस पूरे मामले को गंभीरता से उठाया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच तथा कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की। जानकारी के मुताबिक, बैठक के दौरान जिला पंचायत सदस्य एकता ठाकुर और अंजली पांडे ने प्रभारी विकासखंड प्रबंधक आरती सोनी और सहायक विकासखंड प्रबंधक संजय कुमार मिश्रा द्वारा किए गए कथित गोलमाल को लेकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

आरोपियों का कर दिया ट्रांसफर
बैठक के दौरान जिला पंचायत सदस्यों ने कहा कि जिन अधिकारियों के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं, उन पर जांच करने की बजाय जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा उनका दूसरे स्थान पर स्थानांतरण कर दिया गया। इस मामले में सबसे ज्यादा आरोपों के घेरे में आरती सोनी और संजय कुमार मिश्रा हैं, जिन्हें जबलपुर और कुंडम ट्रांसफर कर दिया गया। जबकि सदस्यों का कहना था कि पहले इनके खिलाफ सख्त जांच होनी चाहिए थी, उसके बाद इन्हें दूसरे स्थान पर भेजा जाना चाहिए था।
उच्च स्तरीय कमेटी करे जांच
यश भारत से चर्चा के दौरान जिला पंचायत सदस्य एकता ठाकुर ने बताया कि इस पूरे मामले में जिन लोगों को जांच दी गई है, वे जूनियर अधिकारी हैं। जबकि भ्रष्टाचार बड़े स्तर पर हुआ है। ऐसे में मामले की जांच अतिरिक्त कलेक्टर स्तर के अधिकारियों से होना चाहिए और इसमें एक संयुक्त जांच दल होना चाहिए, जो सभी पहलुओं पर बारीकी से जांच कर सके। क्योंकि विभागीय स्तर पर जो जांच होगी, उसमें लीपापोती की आशंका बनी रहेगी।

लगातार हो रही शिकायतें
इन दोनों अधिकारियों को लेकर संकुल स्तरीय संगठन और स्व सहायता समूह की महिलाएं लगातार शिकायत कर रही हैं तथा शिकायतों के संबंध में कुछ पुख्ता प्रमाण भी प्रस्तुत कर रही हैं, जिनमें पैसों के लेनदेन, गलत एंट्री और बैंकिंग फ्रॉड जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। लेकिन उसके बाद भी अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। ऐसे में एनआरएलएम मिशन के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ जाती है।







