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‘मेरा यादगार केस’ ….. गेहूं के दाने ने खोला खौफनाक राज, मासूम की हुई थी अंधी हत्या …. जबलपुर एसपी संपत उपाध्याय का यादगार केस रणनीति, सस्पेंस और दर्द से भरी 30 घंटे की कहानी…

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एक रात.. और अचानक गायब हो गया मासूम

भोपाल की सर्द रात… साल 2019 का आखिरी दौर। भोपाल के कोलार थाना क्षेत्र में साल 2019 के आखिरी दिनों की एक घटना आज भी पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय के लिए सबसे यादगार केस बनी हुई है. एक 4 साल का बच्चा खेलते-खेलते अचानक गायब हो जाता है। कुछ ही मिनटों में घर का माहौल खुशियों से मातम में बदल जाता है। चीखें, बेचैनी और एक ही सवाल- ‘मेरा बच्चा कहां है? ‘सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

पुलिस की एंट्री… और उम्मीद की शुरुआत

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंचती है। उस वक्त एसपी साउथ के रूप में पदस्थ संपत उपाध्याय इस केस को खुद संभालते हैं। तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू होता है-गली-गली, घर-घर, हर कोना छाना जाता है।

जंगल की तरफ इशारा करता आखिरी सुराग

जांच में सामने आता है कि बच्चे की आखिरी लोकेशन कलियासोत हैम से जंगल की और जाने वाले रास्ते पर मिली है। पुलिस को उम्मीद होती है-शायद बच्चा रास्ता भटक गया हो। पूरी टीम जंगल में उतर जाती है… लेकिन घंटों की तलाश के बाद भी कुछ नहीं मिलता।

24 घंटे चाद जब हर सुराग खत्म हो गया

एक पूरा दिन गुजर जाता है। न कोई आवाज, न कोई गवाह, न कोई सुराग। यह केस अब रहस्य बन चुका था। तभी पुलिस एक बड़ा फैसला लेती है रणनीति बदलने का। पुलिस इलाके से हटने का नाटक करती है। खबर फैलती है- ‘अब जांच दूसरी दिशा में जाएगी।’ लेकिन असल में पुलिस सिविल ड्रेस में वहीं मौजूद रहती है, हर हरकत पर नजर रखते हुए।

धूएं की एक लकीर… और बढ़ता शक

तभी एक बंद पड़े मकान से हल्का धुआं उठता दिखता है। आम नजरों के लिए यह मामूली बात थी, लेकिन पुलिस के लिए यह एक संकेत था। टीम तुरंत मौके पर पहुंचती है.. और दरवाजा खुलते ही सब कुछ बदल जाता है।

अंदर का मंजर… जिसने सबको हिला दिया

कमरे के भीतर आधा जला हुआ मासूम का शव पड़ा था। जिस बच्चे को जिंदा ढूंढा जा रहा था, वह अब इस हालत
में मिला। उस पल पूरा माहौल सन्न हो गया… और केस अब गुमशुदगी से मर्डर में बदल चुका था। कोई गवाह नहीं, कोई साफ सुराग नहीं। लेकिन पुलिस हार मानने को तैयार नहीं थी। एफएसएल टीम बुलाई गई। हर कोना, हर धूल, हर निशान सबकी जांच शुरू हुई।

एक छोटा सा गेहूं का दाना… और खौफनाक कबूलनामा

तभी पुलिस की नजर एक मामूली से गेहूं के दाने पर पड़ी। यही दाना इस केस की चाबी बन गया। जांच में पता चला-ऐसा गेहूं पास ही एक घर में सुखाया जा रहा, हाउस घर में एक महिला अकेली रहती थी। सवाल उठा-इतना गेहूं क्यों? पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। पहले वह चुप रही… लेकिन सख्ती बढ़ते ही सच सामने आ गया।महिला ने बताया-बच्चा खेलते हुए उसके घर आ गया था। शोर से परेशान होकर उसने गुस्से में उसका गला दबा दिया।

सबसे दर्दनाक सच… अब बच्चा जिंदा था

इस केस का सबसे खौफनाक सच यह था कि जब महिला ने बच्चे को गेहूं के ड्रम में डाला… तब वह पूरी तरह मृत नहीं था। यानी, उसकी जान बच सकती थी… लेकिन उसे बेरहमी से खत्म कर दिया गया। सबूत मिटाने की कोशिश… और एक गलती
महिला ने शव को छुपाने के लिए बंद मकान में ले जाकर जलाने की कोशिश की। लेकिन वही धुआ … उसकी सबसे बड़ी गलती बन गया।

30 घंटे… और खत्म हुआ रहस्य

सिर्फ 30 घंटे के भीतर पुलिस ने इस जटिल केस को सुलझा दिया। एक छोटी सी चीज-गेहूं का दाना-पूरे केस की कड़ी बन गया। एसपी का संदेश-सावधानी ही सुलझा है संपत उपाध्याय कहते हैं कि यह केस हमें एक बड़ा सामाजिक
संदेश देता है-बच्चों की सुरक्षा को लेकर कभी भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। अपराधी कोई भी हो सकता है-महिला या पुरुष। सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

दर्द और संतोष दोनों साथ

इस केस में एक मासूम को खोने का दुख हमेशा रहेगा, लेकिन समय रहते अपराधी को पकड़ने और केस सुलझाने का संतोष भी है। यह केस आज भी इस बात का उदाहरण है कि पुलिस की सूझबूझ और छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान कितनी बड़ी सच्चाई सामने ला सकता है।
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