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मूंग उपार्जन मामला: गोदामो के चयन में जमकर हुई धांधली-नियमों को ताक पर रखकर बनाए जा रहे केंद्र

 

 

जबलपुर यश भारत। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर जिले में शुरू होने जा रही मूंग की खरीद को लेकर रोज़ नए खुलासे हो रहे हैं। एक ओर जहां खरीदी एजेंसी के निर्धारण को लेकर कलेक्टर ने जांच बैठा दी है वहीं दूसरी तरफ जिन गोदाम में मूंग की खरीदी होना निश्चित हुआ है वहां भी जमकर गोलमाल हुआ है। यश भारत को मिली जानकारी के मुताबिक शासन द्वारा जो उपार्जन और भंडारण की नीति तय की गई है उसे किनारे करते हुए मनमर्जी से गोदाम का चयन कर लिया गया है। स्थिति तो यहां तक निर्मित हुई है कि जिन गोदाम को शान प्रतिसत खाली होने पर भी किराया देता होता है वहां केंद्र स्थापित नहीं किए गए हैं। दूसरी तरफ जिन गोदाम में पहले से ही खाद्यान्न रखा हुआ है वहां केंद्र स्थापित कर दिए गए।

खाली गोदाम का किराया 25 लाख प्रति माह

गोदाम के निर्धारण में भ्रष्टाचार इस बात से समझा जा सकता है कि सिहोरा तहसील के गौराहा में 30000 मेट्रिक टन का गोदाम खाली पड़ा है। बी ओ टी स्कीम के अंतर्गत है याने गोदाम खाली रहे या भरा रहे गोदाम संचालक को उसका किराया दिया जाएगा। जबकि यह गोदाम 80% खाली पड़ा हुआ है उसके बाद भी यहां पर मूंग का उपार्जन केंद्र नहीं खोला गया है। जबकि मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन इसी गोदाम के लिए हर माह लगभग 25 लख रुपए का किराया देता है ।

गोदाम में नहीं है जगह

जानकारी के मुताबिक जिन 21 गोदाम में उपार्जन केंद्र स्थापित किया जा रहे हैं उनमें से कुछ गोदाम में ऐसी हैं जिनमे मूंग के उपार्जन और भंडारण के लिए पर्याप्त स्थान ही नहीं है। जानकारी के मुताबिक मूंग के उपार्जन केंद्र उन गोदामो में खोले जाने थे जहां लगभग 3000 मैट्रिक टंकी जगह खाली हो, क्योंकि बरसात का मौसम होने के चलते शासन द्वारा किसानों द्वारा लाई गई मूंग को गोदाम के अंदर डंप करने की व्यवस्था सुनिश्चित की है, और उसके बाद उसकी तुलाई भी अंदर ही होना तय किया है। जिसके चलते गोदाम में अधिक जगह की आवश्यकता पड़ेगी। लेकिन कुछ गोदाम ऐसी हैं जहां 1000 मेट्रिक टन से भी कम जगह खाली है उसके बाद भी वहां केंद्र बना दिए गए।

किसानों का रुक सकता है भुगतान

इस पूरे मामले में सबसे बड़ी बात तो यह सामने आई है की चयनित भंडारण केंद्रों में बहुत से ऐसे गोदाम है जो केंद्र सरकार की नीति के अनुरूप नहीं है। याने उपार्जन नीति में स्पष्ट है कि केंद्रों की स्थापना में WDRA लाइसेंस की अनिवार्यता है ऐसा न होने पर किसानों का भुगतान भी रुक सकता है। उसके बाद भी कई ऐसे गोदाम है जो WDRA लाइसेंस प्राप्त नहीं है । लेकिन उन्हें केंद्र बना दिया गया। जबकि ब्रांच स्तर पर जो खाली गोदाम की सूची बुलाई गई थी वह सिर्फ WDRA लाइसेंस वाले गोदाम की सूची मुख्यालय द्वारा बुलाई गई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना लाइसेंस के गोदाम में केंद्र की स्थापना किस अधिकारी के कहने पर हुई।

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