किसानों को बड़ी राहत: अब फसल ऋण चुकाने के लिए मिलेगा पूरा एक साल

किसानों को बड़ी राहत: अब फसल ऋण चुकाने के लिए मिलेगा पूरा एक साल
– कैबिनेट का फैसला, जीरो प्रतिशत ब्याज पर ऋण अदायगी की समयसीमा बदली; शिक्षा और सामाजिक योजनाओं को भी मिली मंजूरी
भोपाल, यश भारत । मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को राहत देने वाला महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए सहकारी बैंकों से लिए जाने वाले ब्याजमुक्त फसल ऋण की अदायगी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब किसानों को हर साल 31 मार्च तक ऋण चुकाने की बाध्यता नहीं रहेगी। किसान जिस तारीख को ऋण लेंगे, उसके ठीक एक वर्ष बाद तक बिना ब्याज के राशि जमा कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से किसानों को फसल चक्र के अनुरूप आर्थिक प्रबंधन में सुविधा मिलेगी और ऋण चुकाने का अनावश्यक दबाव कम होगा।
25 हजार करोड़ के ऋण वितरण व्यवस्था में बदलाव
प्रदेश सरकार सहकारी बैंकों के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर बड़ी मात्रा में फसल ऋण उपलब्ध कराती है। अभी तक किसानों को निर्धारित वित्तीय वर्ष के भीतर ऋण लौटाना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत ऋण लेने की तारीख ही अदायगी की आधार तिथि होगी। इससे किसान खरीफ और रबी सीजन के बीच वित्तीय संतुलन बेहतर तरीके से बना सकेंगे।
सरकार के अनुसार इस फैसले से राज्य पर लगभग 880 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा, लेकिन किसानों को मिलने वाली राहत को देखते हुए इसे जरूरी कदम माना गया है।
सामाजिक योजनाओं को भी मिला विस्तार
कैबिनेट ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने का भी निर्णय लिया। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना को अगले पांच वर्षों तक संचालित करने की मंजूरी दी गई है। लगभग 1740 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना के तहत पात्र परिवारों को विवाह के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
इसके अलावा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न परिवहन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए 3580 करोड़ रुपये की योजना को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।
शिक्षा क्षेत्र में नए विस्तार की तैयारी
प्रदेश में बढ़ती शैक्षणिक जरूरतों को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से तैयार किए गए सर्वे और मैपिंग के आधार पर नए विद्यालयों के संचालन का निर्णय लिया गया है। सरकार ने आगामी तीन वर्षों में 214 नए हायर सेकेंडरी स्कूल शुरू करने और जरूरत के अनुसार कई स्कूलों को उच्चतर स्तर पर उन्नत करने की योजना को मंजूरी दी है।
इस परियोजना के लिए 635 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराना है।
विधि शिक्षा को भी मिलेगा बढ़ावा
कैबिनेट ने शुजालपुर में स्वतंत्र विधि महाविद्यालय संचालित करने का निर्णय भी लिया है। साथ ही प्रदेश के विधि महाविद्यालयों में रिक्त शिक्षकीय पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी किए जाने की जानकारी दी गई। सरकार का दावा है कि इससे विधि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।
कैबिनेट के ताजा फैसलों को किसानों, विद्यार्थियों और सामाजिक योजनाओं के लाभार्थियों के लिए राहत और सुविधाओं के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।






