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इजरायल जंग ने दी दुनिया को चेतावनी , टेक्नोलॉजी और आत्मनिर्भरता ही भविष्य की असली ताकत

  1. इजरायल जंग ने दी दुनिया को चेतावनी , टेक्नोलॉजी और आत्मनिर्भरता ही भविष्य की असली ताकत

यश भारत भोपाल। वैश्विक स्तर पर चल रहे ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव ने सिर्फ भू-राजनीति ही नहीं बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम जीवन को भी गहराई से प्रभावित किया है। इस संघर्ष ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि भविष्य में वही देश आगे बढ़ेंगे जो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और मजबूत होंग ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव ने पूरी दुनिया को एक अहम सीख दी है आने वाले समय में प्रगति का रास्ता तकनीकी आत्मनिर्भरता से होकर ही गुजरता है। युद्ध के दौरान सूचना, संसाधन और तकनीक के आदान-प्रदान में जिस तेजी से बदलाव आया है उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्ध और वैश्विक प्रतिस्पर्धा अब पूरी तरह तकनीक आधारित हो चुकी है। इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर देखने को मिला है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से दुनिया के सामने गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग एक-तिहाई हिस्सा वहन करता है और इसके प्रभावित होते ही ईंधन आयात पर निर्भर देशों की स्थिति कमजोर हो गई है। ऊर्जा संकट के इस दौर में दुनिया तेजी से वैकल्पिक स्रोतों की ओर मुड़ी है। इसका सीधा फायदा चीन को मिला है जिसने क्लीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ के चलते वैश्विक बाजार में बढ़त बना ली है। चीन के सोलर पैनल लिथियम आयन बैटरियों और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में अचानक भारी उछाल देखा गया है। आंकड़ों के अनुसार चीन के क्लीन टेक निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। लिथियम आयन बैटरियों के निर्यात में सालाना आधार पर 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात 53 प्रतिशत तक बढ़ गया है। वहीं सोलर सेल्स के निर्यात में मासिक आधार पर 80 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन देशों के पास उन्नत तकनीक और उत्पादन क्षमता है, वही इस संकट को अवसर में बदल पा रहे हैं। वहीं तकनीक और ऊर्जा के लिए दूसरों पर निर्भर देश इस समय सबसे अधिक दबाव में हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में केवल सैन्य शक्ति ही नहीं बल्कि तकनीकी शक्ति और आत्मनिर्भरता ही किसी भी देश की असली ताकत होगी। ऐसे में भारत समेत सभी देशों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से निवेश करें, ताकि भविष्य की चुनौतियों का मजबूती से सामना किया जा सके।

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