यश भारत भोपाल।

नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर मानवाधिकार आयोग सख्त
एटा के कथित कोचिंग संस्थान से जुड़े मामले में चार पक्षों को नोटिस, दो सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
भोपाल यश भारत। उत्तर प्रदेश के एटा जिले में कथित कोचिंग संस्थान से जुड़े नाबालिग बच्चों को कथित तौर पर स्क्रिप्ट के जरिए आपत्तिजनक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सोशल मीडिया वीडियो में बार बार इस्तेमाल किए जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। शिकायत में बच्चों की गरिमा निजता मनोवैज्ञानिक सुरक्षा अभिभावकीय सहमति और संभावित शोषण को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी। सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने एटा के एसएसपी जिलाधिकारी मेटा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं कंट्री हेड तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने संबंधित पक्षों से दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट एटीआर पेश करने को कहा है।
बच्चों की पहचान कर सुरक्षा और काउंसलिंग के निर्देश
आयोग ने पुलिस को मामले से जुड़े नाबालिग बच्चों की पहचान करने और आवश्यकता होने पर उन्हें बाल कल्याण समिति सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। बच्चों की सुरक्षा और काउंसलिंग सुनिश्चित करने के साथ यह भी जांचने को कहा गया है कि वीडियो की स्क्रिप्टिंग रिकॉर्डिंग अपलोडिंग और प्रसार में किन लोगों की भूमिका रही। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि जांच में कोई संज्ञेय अपराध सामने आने पर एफआईआर दर्ज करने समेत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही बच्चों की पहचान गरिमा और निजता की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मेटा से पूछा वीडियो बार बार अपलोड कैसे हुए
आयोग ने मेटा से भी पूछा है कि नाबालिग बच्चों से संबंधित सामग्री को बार बार अपलोड और प्रसारित होने की अनुमति कैसे मिली। आयोग ने यह भी जानकारी मांगी है कि इस सामग्री से किसी तरह का मुद्रीकरण या व्यावसायिक लाभ हुआ या नहीं। इसके अलावा संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी गई है। आयोग ने कहा है कि जांच का मुख्य फोकस बच्चों के बजाय उन वयस्कों या अन्य व्यक्तियों की भूमिका पर होना चाहिए जो बच्चों की स्क्रिप्टिंग रिकॉर्डिंग अपलोडिंग सामग्री के नियंत्रण अथवा संभावित व्यावसायिक इस्तेमाल में शामिल रहे हों। आयोग के निर्देश के बाद अब पुलिस जिला प्रशासन और संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।






