यह कैसा चल रहा जल गंगा संवर्धन अभियान…? , जलकुंभी से दम तोड़ रही जीवनदायिनी हिरण नदी
बैठक में गूंजेगा जल गंगा संवर्धन का मुद्दा

जबलपुर यशभारत। सरकार द्वारा चलाए जा रहे “जल गंगा संवर्धन अभियान” के दावों की हकीकत हिरण नदी की बदहाल तस्वीर बयां कर रही है। कभी क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली हिरण नदी आज जलकुंभी की मोटी परत से पूरी तरह अटी पड़ी है। नदी का बहाव प्रभावित हो चुका है और कई स्थानों पर पानी सड़ने लगा है, जिससे आसपास के ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
जमीनी हकीकत ठीक उलट

नदी की सफाई और संरक्षण के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्थिति इसके ठीक उलट दिखाई दे रही है। जलकुंभी के कारण नदी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो रही है, जिससे जलीय जीवों पर भी संकट मंडराने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि अभियान केवल कागजों और फोटो सेशन तक सीमित होकर रह गया है, जबकि नदी की वास्तविक सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
कार्यप्रणाली पर खड़े हो रहे बड़े सवाल
स्थानीय लोगो के मुताबिक हिरण नदी के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। बरसात से पहले यदि नदी की सफाई नहीं कराई गई तो जलभराव और गंदगी की समस्या और गंभीर हो सकती है।हिरण नदी की यह बदहाल स्थिति “जल गंगा संवर्धन अभियान” की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में नदी केवल नाम भर की रह जाएगी।
कागजी व फोटो सेशन तक सिमटा अभियान
सरकार का जल गंगा संवर्धन अभियान जमीनी स्तर पर दम तोड़ता नजर आ रहा है। नदी-तालाबों में जलकुंभी और गंदगी का अंबार लगा है जबकि जिम्मेदार केवल फोटो सेशन और कागजी दावों में व्यस्त हैं। जिले की पाटन जनपद पंचायत के सदस्य ठाकुर हाकिम सिंह उर्फ गब्बू ने बताया कि आगामी होने वाली बैठक में अभियान की हकीकत अधिकारियों की लापरवाही और दिखावटी व्यवस्थाओं पर जोरदार सवाल उठाएंगे। उनके अनुसार कार्य क्षेत्र राजघाट पोड़ी में हिरण नदी जिस तरह से जलकुंभी से अटी पड़ी है यह एक इस अभियान की बानगी है। जिसकी साफ सफाई के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में कोई पहल तक संबंधितो द्वारा नहीं की गई।उन्होंने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत लाखों करोड़ों खर्च किया जा रहा है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
हिरण नदी की बदहाली के यह हैं प्रमुख कारण
■ नदी में तेजी से फैल रही जलकुंभी ने रोका पानी का बहाव
■ सफाई अभियान केवल कागजों और फोटो सेशन तक सीमित
■ जिम्मेदार विभागों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग का अभाव
■ जलीय जीवों पर मंडरा रहा संकट, पानी में घट रही ऑक्सीजन
■ बरसात से पहले सफाई नहीं हुई तो बढ़ सकती है जलभराव की समस्या
■ ग्रामीणों और किसानों में प्रशासन के प्रति बढ़ रहा आक्रोश
लोगों ने उठाई ये मांगें
■ हिरण नदी से तत्काल जलकुंभी हटाई जाए
■ स्थायी सफाई अभियान चलाकर निगरानी बढ़ाई जाए
■ नदी संरक्षण के नाम पर खर्च राशि की जांच हो
■ स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए
■ नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना लागू हो।








