जबलपुरमध्य प्रदेश

घर-घर खुले होटल, सुरक्षा राम भरोसे: जीरो डिग्री, उखरी, विजयनगर से यादव कॉलोनी तक फैला अव्यवस्थित होटल नेटवर्क

होटल हत्याकांड ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े किए बड़े सवाल

जबलपुर। संजीवनी नगर थाना क्षेत्र स्थित रिलैक्स इन होटल में महिला हत्याकांड की घटना ने सिर्फ एक आपराधिक वारदात को उजागर नहीं किया, बल्कि शहर में तेजी से फैल रहे अव्यवस्थित होटल कारोबार की गंभीर तस्वीर भी सामने ला दी है। पुलिस ने मामले के मुख्य संदेही को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और जल्द खुलासे की बात कही जा रही है, लेकिन इस बीच शहर के कई इलाकों में संचालित हो रहे होटल और लॉज की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि होटल संचालन के नियमों का सख्ती से पालन होता तो इस तरह की घटनाओं पर पहले ही नियंत्रण लगाया जा सकता था।
रिहायशी मकानों को बनाया जा रहा होटल, तेजी से बढ़ रहा कारोबार
सूत्रों के अनुसार जीरो डिग्री, उखरी, विजयनगर, यादव कॉलोनी सहित शहर के कई प्रमुख इलाकों में बड़ी संख्या में रिहायशी मकानों को होटल और लॉज में तब्दील कर दिया गया है। जिन भवनों को रहने के लिए बनाया गया था, वहां अब कमरों को किराए पर देकर होटल जैसा संचालन किया जा रहा है। कई स्थानों पर पार्किंग व्यवस्था नहीं है, सुरक्षा मानक अधूरे हैं और पड़ोस में रहने वाले लोग भी इससे परेशान बताए जा रहे हैं।

पहचान बदलकर फिर शुरू हो जाते हैं होटल

स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि कई होटल कार्रवाई या शिकायत के बाद अपना नाम बदल लेते हैं और कुछ समय बाद दोबारा संचालन शुरू कर देते हैं। कहीं मालिक का नाम बदल दिया जाता है तो कहीं बोर्ड बदलकर नया व्यवसाय दिखाया जाता है। इस वजह से प्रशासनिक निगरानी कमजोर पड़ जाती है और नियमों का उल्लंघन करने वाले आसानी से बच निकलते हैं।

बिना आईडी और अधूरी जानकारी पर दिए जा रहे कमरे

सबसे गंभीर आरोप यह है कि कई छोटे-बड़े होटलों में ग्राहकों की पहचान सत्यापन प्रक्रिया बेहद कमजोर है। कई जगह केवल नाम और मोबाइल नंबर लिखकर कमरे दे दिए जाते हैं, जबकि कुछ स्थानों पर वैध पहचान पत्र तक नहीं मांगे जाते। होटल रजिस्टर में अधूरी जानकारी दर्ज कर केवल औपचारिकताएं पूरी कर ली जाती हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लापरवाही अपराधियों के लिए आसान रास्ता तैयार कर सकती है।

स्थानीय लोग भी जता रहे चिंता

इन इलाकों में रहने वाले कई लोगों का कहना है कि होटलों में आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियां संदिग्ध लगती हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होती। देर रात तक आवाजाही, वाहनों की भीड़ और संदिग्ध गतिविधियों के कारण आसपास रहने वाले परिवार असहज महसूस करते हैं।

रिलैक्स इन हत्याकांड बना बड़ा उदाहरण

धनवंतरी नगर स्थित होटल में महिला की हत्या के बाद यह सवाल और तेज हो गया है कि आखिर होटल प्रबंधन ने ठहरने आए लोगों की पहचान और रिकॉर्ड की जांच कितनी गंभीरता से की थी। यदि सख्त सत्यापन और निगरानी व्यवस्था होती तो शायद इस वारदात को रोका जा सकता था या संदेह पहले ही पैदा हो सकता था।

अब प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेज

शहरवासियों का कहना है कि केवल इस एक मामले की जांच पर्याप्त नहीं है। शहर में संचालित सभी होटल, लॉज और गेस्ट हाउस की व्यापक जांच होनी चाहिए। जिन स्थानों पर नियमों का उल्लंघन हो रहा है, वहां लाइसेंस निरस्त करने और सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे नेटवर्क पर कितनी गंभीरता से कदम उठाता है।

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