
सिविल जज भर्ती 2022 में आरक्षित अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत
फिर से बनेगा रिजल्ट, आरक्षित अभ्यर्थियों को मिलेगा इंटरव्यू का मौका
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सिविल जज भर्ती नियम 2023 पर फिर उठे सवाल, क्वालीफाई अंक में छूट पर हुई महत्वपूर्ण सुनवाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिविजनल बेंच, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस संजीव सचदेवा कर रहे हैं, ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती नियम 2023 में किए गए संशोधन पर गंभीर विचार किया है। साल 2022 की सिविल जज भर्ती का विज्ञापन 2023 में प्रकाशित हुआ था। इस भर्ती में लागू संशोधन के अनुसार अब अनारक्षित और आरक्षित दोनों ही वर्गों के लिए मुख्य परीक्षा में न्यूनतम 50% अंक और इंटरव्यू में 40% अंक क्वालीफाई करने के लिए अनिवार्य कर दिए गए हैं। इस नियम के लागू होने का सीधा असर उन आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों पर पड़ रहा है, जो पूर्व में निर्धारित न्यूनतम अंकों पर पात्र होते थे।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विनायक शाह और अधिवक्ता पुष्पेंद्र शाह ने रखा पक्ष
इस संशोधन को एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस नामक संस्था ने WP 40833/2024 के माध्यम से चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विनायक शाह और पुष्पेंद्र शाह ने दलील दी कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को क्वालीफाई अंक में अनिवार्य रूप से रिलेक्सेशन दिया जाना चाहिए, क्योंकि संविधान और न्यायिक व्यवस्था के अनुसार आरक्षण का उद्देश्य ही प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि संशोधित क्वालीफाई मार्क्स आरक्षित वर्ग के वास्तविक चयन अवसरों को कम कर रहे हैं।
रजिस्ट्रार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट, अगली सुनवाई में होगी प्रस्तुति
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस मुद्दे को अत्यंत महत्वपूर्ण माना और उच्च न्यायालय रजिस्ट्रार को आदेशित किया कि वह यह रिपोर्ट प्रस्तुत करें कि यदि मुख्य परीक्षा के क्वालीफाई अंक क्रमशः 45% और 40% कर दिए जाएं, तो कितने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए योग्य हो जाएंगे। रजिस्ट्रार को अगली सुनवाई में यह पूरी जानकारी कोर्ट के समक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश के बाद अब यह मामला आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए बड़ी राहत और सिविल जज भर्ती प्रक्रिया में संभावित बदलाव का संकेत माना जा रहा है।






