हनुमानताल जीर्णोद्धार या बंटाधार? कांग्रेस ने उठाये गंभीर सवाल,
Hanumantal renovation or ruin? Congress raised serious questions,

हनुमानताल जीर्णोद्धार या बंटाधार? कांग्रेस ने उठाये गंभीर सवाल,
जबलपुर के ऐतिहासिक हनुमानताल के जीर्णोद्धार कार्य में कथित भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस ने आज तीखे तेवर दिखाए। कांग्रेस के पूर्व विधायक विनय सक्सेना ने हनुमानताल की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए सवाल किया कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है क्या यह जीर्णोद्धार हुआ है या बंटाधार।

करोड़ों के काम में धांधली का आरोप
सक्सेना ने कहा कि जब काम की शुरुआत हुई थी, तब किसी ने आशंका नहीं जताई थी, क्योंकि यह जबलपुर की संस्कारधानी और धार्मिक आस्था का केंद्र बिंदु है, और इस पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए थी। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि दो-दो टेंडर जारी होने, बड़े नेताओं की घोषणाओं और उपमुख्यमंत्री के निरीक्षण के बावजूद भी काम में लापरवाही बरती गई। ऐसा लग रहा था जैसे वर्षा ऋतु का इंतजार हो और सब घोटाले हो जाएं, पैसे की बंदरबांट हो जाए। उन्होंने बताया कि काम के दौरान मशीनें और डंपर एक-दो महीने चले और फिर आधे या एक घंटे चलकर बंद हो जाते थे। सक्सेना ने सवाल किया कि इस सब में पैसा कहां गया।

पुलिस, लोकायुक्त और हाईकोर्ट जाने की तैयारी
इस पूरे मामले की जांच की मांग को लेकर कांग्रेस ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में ज्ञापन सौंपा है। सक्सेना ने कहा कि इसके बाद वे लोकायुक्त में भी शिकायत करेंगे और माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे। पूर्व विधायक ने बड़े नेताओं द्वारा की गई घोषणाओं और पूजा-पाठ में शामिल होने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि सांसद और विधायकों ने कितनी राशि दी या वे केवल घोषणा वीर बनकर रह गए और यह सब सिर्फ दिखावा था।
ठेकेदार, जनप्रतिनिधि और अफसर की मिलीभगत का आरोप
सक्सेना ने दावा किया कि यह सब ठेकेदारों, जनप्रतिनिधियों और अफसरों की मिलीभगत का नतीजा है। उनका कहना था कि यदि इन तीनों का गठजोड़ न होता तो यह घोटाला नहीं होता। उन्होंने बताया कि एक टेंडर 1 करोड़ रुपये का था, दूसरा 50-60 लाख रुपये का, और इसके अलावा कई छोटे-छोटे 2-2 लाख रुपये के टेंडर भी किए गए। उन्होंने पूछा कि यह सारा पैसा आखिर गया कहां।

कागजों पर ही सिमटा काम?
विनय सक्सेना ने शहर के नागरिकों से हनुमानताल की मौजूदा स्थिति देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि अभी तक हनुमानताल में कोई एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) नहीं लगा है, न ही पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए कोई प्रावधान किया गया है। उनके अनुसार, सिर्फ कागजों पर डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) बनी, कागजों पर ही खर्च हुआ और कागजों पर ही काम हो गया। कांग्रेस ने बताया कि अब तक जो कुल डीपीआर सामने आई है, वह 1 करोड़ 60 लाख रुपये की है, जिसमें दो टेंडर शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसके अलावा भी कई अन्य टेंडर हैं, जिनकी पड़ताल जारी है और जल्द ही इसका खुलासा किया जाएगा। इस दौरान पूर्व पार्षद साथी और जबलपुर शहर के लिए जज्बा रखने वाले कांग्रेस परिवार के कई लोग और हनुमानताल क्षेत्र के निवासी भी मौजूद थे, जिन्होंने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की।






