मेडिकल विश्वविद्यालय के प्रस्तावित विभाजन पर रोक लगाने की मांग, पूर्व मंत्री तरुण भनोट ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
विश्वविद्यालय के विभाजन से प्रशासनिक और वित्तीय भार बढ़ सकता है

जबलपुर,यशभारत। मध्यप्रदेश मेडिकल विश्वविद्यालय के प्रस्तावित विभाजन को लेकर पूर्व मंत्री तरुण भनोट ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर इस निर्णय पर तत्काल रोक लगाने और व्यापक विचार-विमर्श कराने की मांग की है। अपने पत्र में तरुण भनोट ने कहा है कि समाचार माध्यमों से जानकारी मिली है कि प्रदेश के मेडिकल विश्वविद्यालय को तीन भागों में विभाजित कर जबलपुर, भोपाल और उज्जैन में अलग-अलग मेडिकल विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने इस प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में एकीकृत विश्वविद्यालय व्यवस्था के माध्यम से प्रशासनिक समन्वय, परीक्षा प्रणाली, शैक्षणिक मानकों की एकरूपता तथा संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो रहा है।
भनोट ने पत्र में उल्लेख किया है कि विश्वविद्यालय के विभाजन से प्रशासनिक और वित्तीय भार बढ़ सकता है तथा नए पदों, भवनों और संसाधनों पर अनावश्यक खर्च होने की आशंका है। इसका प्रतिकूल प्रभाव चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और अन्य विकास कार्यों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जबलपुर स्थित मेडिकल विश्वविद्यालय ने वर्षों से प्रदेश के चिकित्सा एवं पैरामेडिकल संस्थानों के संचालन, परीक्षा और संबद्धता संबंधी कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में किसी भी बड़े संरचनात्मक परिवर्तन से पहले चिकित्सा महाविद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।
पूर्व मंत्री ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि प्रस्तावित विभाजन पर अंतिम निर्णय लेने से पहले जनपरामर्श और विशेषज्ञ समिति की अनुशंसा प्राप्त की जाए तथा तब तक इस योजना पर रोक लगाई जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार विद्यार्थियों, चिकित्सा शिक्षकों और जनहित को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेगी।







