कृषि विभाग की कार्रवाई से खाद विक्रेताओं हड़कंप
एक ही सीजन में हुई 10 FIR, मिलावट से लेकर कालाबाजारी तक के मामले हुए दर्ज

जबलपुर यश भारत। खाद्य संकट और मिलावट को लेकर इस बार कृषि विभाग द्वारा सबसे ज्यादा कार्यवाही की गई है। इस पूरे सीजन में विभाग की तरफ से 10 FIR की गई। जिसमें सात मामले कालाबाजारी या फिर ऊंची दर पर खाद बेचने से संबंधित थे, तो दो मामले मिलावटी बीज के थे वही एक किसान के साथ धोखाधड़ी के मामले में मामला दर्ज किया गया। इसके साथी डीएपी संकट के दौरान खाद के वितरण और उसकी कालाबाजारी रोकने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा दुकानों पर बैठकर खाद का वितरण निर्धारित दर पर सुनिश्चित किया गया। जिसके चलते किसानों को खास फायदा हुआ है।
पहला मामला
पिछले महीने जब जिले में सबसे ज्यादा डीएपी खाद का संकट चल रहा था और व्यापारी उसे ऊंची दर पर बेच रहे थे उसे दौरान खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा रेक पॉइंट से जो 30% का स्टॉक निजी विक्रेताओं को मिलता है उसका विक्रय अपनी मौजूदगी में कराया जिसके लिए पूरे जिले में टीम बनाई गई थी और खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा निजी दुकानों में बैठकर किसानों के लिए डीएपी खाद का विक्रय किया। क्योंकि इस दौरान लगातार शिकायतें आ रही थी कि डीएपी की कमी के चलते व्यापारी ऊंची कीमतों पर किसानों को विक्रय कर रहे हैं जिसे रोकने के लिए प्रत्येक दुकान पर कृषि विभाग के अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई थी।
दूसरा मामला
जिले में मटर की बोनी के दौरान ऊंची कीमतों पर मटर का बीज बेचा जा रहा था । जिसमें सबसे ज्यादा मिलावट की शिकायत है सामने आ रही थी । जिसको लेकर कृषि विभाग के द्वारा एक निजी कंपनी के पैकिंग सेंटर पर बड़ी कार्रवाई की गई । जहां लाखों रुपए कीमत का मटर का बीज बरामद किया गया जो दक्षिण भारत की किसी कंपनी के नाम पर जबलपुर में पैक हो रहा था। साथ ही साथ जिस क्वालिटी का पैकेट में जानकारी दी जा रही थी वह उस क्वालिटी का नहीं था जिसमें मिलावटी बीच भरकर किसानों के साथ धोखाधड़ी की जा रही थी। जिसको लेकर कृषि विभाग द्वारा एक बड़ी कार्यवाही की ही गई। साथ ही साथ धोखाधड़ी करने वाले लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला भी दर्ज कराया गया।
तीसरा मामला
इस साल सबसे ज्यादा कार्यवाही कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ हुई है। जिसमें रिकॉर्ड 7 मामले थाने में दर्ज कराए गए हैं। वही ऐसे बहुत से मामले थे जिमें दुकान संचालकों के खिलाफ पुख्ता सबूत न मिलने के कारण उन्हें समझाइए देकर छोड़ना पड़ा। विभाग द्वारा इस साल बीज के 554 नमूने एकत्रित किए गए वहीं उर्वरक के 345 और कीटनाशक के 58 नमूने प्रयोगशाला में भेजे गए हैं । जिनकी रिपोर्ट आने के बाद यदि कोई गंभीर आनियमिताये पाई जाती है तो मामला दर्ज किया जाएगा। कृषि विभाग की कार्यवाहियों के चलते एक ओर जहां खाद विक्रेताओं में डर का माहौल है वहीं किसानों को फायदा हो रहा है।








