मौत के बाद भी नहीं मिलता सुकून: पोस्टमार्टम के लिए 12 किमी भटकते परिजन
ग्रामीण अस्पतालों में सुविधा, लेकिन शहर के जिला अस्पताल विक्टोरिया में आज भी नहीं हो पाता पोस्टमार्टम

जबलपुर, यशभारत। किसी अपने को खोने का दर्द कम नहीं होता, लेकिन जब अंतिम विदाई से पहले भी परिवार को अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ें, तो यह पीड़ा और गहरी हो जाती है। शहर के सबसे पुराने और प्रमुख जिला अस्पताल विक्टोरिया में आज तक पोस्टमार्टम की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। हालत यह है कि अस्पताल में मर्चुरी होने के बावजूद हर शव को पोस्टमार्टम के लिए करीब 12 किलोमीटर दूर नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजना पड़ता है।
विडंबना यह है कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में शहपुरा, कुंडम और सिहोरा अस्पतालों में पोस्टमार्टम की सुविधा उपलब्ध है, जबकि शहरी क्षेत्र में सिर्फ मेडिकल कॉलेज अस्पताल ही एकमात्र केंद्र है, जहां सभी मामलों का पोस्टमार्टम किया जाता है। ऐसे में विक्टोरिया अस्पताल की निर्भरता मेडिकल कॉलेज पर बनी हुई है और इसका खामियाजा शोकाकुल परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।
दुख के बीच घंटों का इंतजार, बढ़ रही बेबसी
दुर्घटना, संदिग्ध मौत या अन्य मामलों में पोस्टमार्टम के लिए शव मेडिकल कॉलेज भेजे जाते हैं। वहां पहले से ही बड़ी संख्या में मामले पहुंचने के कारण कई बार परिजनों को घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। परिवहन, कागजी कार्रवाई और अंतिम संस्कार की तैयारियों के बीच परिवारों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। कई बार दूर-दराज से आए रिश्तेदारों को भी लंबा इंतजार करना पड़ता है और अंतिम विदाई में अनचाही देरी हो जाती है।
ग्रामीण इलाकों से बेहतर व्यवस्था, शहर पीछे
हैरानी की बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के शहपुरा, कुंडम और सिहोरा जैसे अस्पतालों में पोस्टमार्टम की व्यवस्था वर्षों से संचालित है, लेकिन जिला मुख्यालय के प्रमुख अस्पताल विक्टोरिया में यह सुविधा अब तक शुरू नहीं हो पाई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि जब ग्रामीण अस्पतालों में यह व्यवस्था संभव है, तो शहर के सबसे बड़े जिला अस्पताल को इससे क्यों वंचित रखा गया है।
मेडिकल कॉलेज पर बढ़ रहा बोझ
जिले के शहरी क्षेत्र का पूरा भार अकेले मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर है। यहां शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में शव पोस्टमार्टम के लिए पहुंचते हैं, जिससे काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विक्टोरिया अस्पताल में पोस्टमार्टम यूनिट शुरू कर दी जाए तो न केवल मेडिकल कॉलेज का अतिरिक्त भार कम होगा, बल्कि शोकाकुल परिवारों को भी राहत मिलेगी।
वर्षों से मांग, फिर भी इंतजार खत्म नहीं
सामाजिक संगठनों और नागरिकों द्वारा लंबे समय से विक्टोरिया अस्पताल में पोस्टमार्टम सुविधा शुरू करने की मांग उठाई जा रही है। लेकिन वर्षों बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। सबसे दुखद यह है कि अपने प्रियजनों को खो चुके परिवारों को अंतिम संस्कार से पहले भी व्यवस्था की खामियों का दर्द झेलना पड़ रहा है और मौत के बाद भी उन्हें सुकून नसीब नहीं हो पा रहा।








